बिलासपुर/ तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब समर्पण और सही दिशा का मेल होता है, तो सफलता कदम चूमती है। हाल ही में देहरादून में संपन्न हुई 21वीं अखिल भारतीय रेन्बुकन कराटे-डो चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ राज्य की टीम ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। प्रतियोगिता में टीम ने कुल 34 पदक हासिल किए, जिसमें स्वर्ण, रजत और कांस्य तीनों श्रेणियों में जीत हासिल की गई।इस अद्वितीय सफलता के केंद्र में हैं रायपुर जिले के प्रशिक्षक नेमश साहू और मुंगेली जिले के वरिष्ठ प्रशिक्षक बहोरन वर्मा, जिनकी मेहनत, दूरदृष्टि और अथक परिश्रम ने न केवल टीम को तैयार किया, बल्कि प्रदेश के कोने-कोने से आई ग्रामीण बेटियों को राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाया।नेमश साहू की यात्रा प्रेरणादायक है, जिन्होंने स्वयं वरिष्ठ कराटे मास्टर ओम प्रकाश यादव के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त किया, वही आज स्वयं एक उत्कृष्ट प्रशिक्षक बनकर उभरें हैं। नेमश साहू ने जूडो, कराटे, मार्शल आर्ट, काता, कुमीते और रेफरी ट्रेनिंग जैसे विषयों में गहराई से दक्षता प्राप्त कर युवाओं को एक नई दिशा दी है। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण बालिकाओं के प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया, जिनके लिए यह अवसर जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।नेमश साहू के नेतृत्व में तैयार की गई बालिकाओं की टीम ने प्रतियोगिता में ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने पूरे देश का ध्यान छत्तीसगढ़ की ओर खींचा। ये वही बेटियाँ हैं, जो कभी स्कूल के खेल मैदान तक नहीं पहुंच पाती थीं, आज राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत रही हैं और इसका श्रेय जाता है नेमश साहू की दूरदर्शिता, अनुशासनप्रियता और तकनीकी निपुणता को।वहीं, बहोरन वर्मा जैसे वरिष्ठ प्रशिक्षक ने पूरी टीम को अनुशासन और आत्मबल का पाठ पढ़ाया। उनकी सख़्त लेकिन प्रेरणादायक ट्रेनिंग ने खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मज़बूत बनाया और मुकाबलों में रणनीतिक बढ़त दिलाई। उनका अनुभव और प्रशिक्षण का ढंग पूरी टीम के प्रदर्शन में साफ दिखाई दिया।टीम में पूनम साहू, अंजली साहू, दामिनी साहू, खुशबू साहू, कुन्ती पाल, रागिनी साहू, जास्मीन कोसले, गीतांजलि डहरिया, दिनेश वर्मा, पीयूष साहू, देवराज साहू, अभिषेक पाटले, समर शास्त्री और चंद्रदेव सिंह जैसे खिलाड़ी शामिल थे, जिन्होंने काता और कुमीते दोनों वर्गों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।छत्तीसगढ़ कराटे फेडरेशन के तत्वावधान में तैयार इस टीम की सफलता पर फेडरेशन के मुख्य प्रशिक्षक सेन्सेई रमाकांत एस. मिश्र ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा, नेमश साहू और बहोरन वर्मा जैसे प्रशिक्षकों की मेहनत और उनके अनुशासनात्मक प्रशिक्षण से ही यह उपलब्धि संभव हो पाई है। यह सिर्फ खेल की जीत नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण युवाओं की सामाजिक और मानसिक जीत है। यह उपलब्धि इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जब समर्पित प्रशिक्षक मिलते हैं, तो सीमित संसाधनों वाले ग्रामीण क्षेत्रों से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाएँ निकल सकती हैं। नेमश साहू और बहोरन वर्मा जैसे प्रशिक्षकों का कार्य आज छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश के लिए एक आदर्श बन गया है। इनकी मेहनत और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।