तरुण कौशिक, संपादक
छत्तीसगढ़ राज्य ल आदिवासी मन के गढ़ माने जाथे अऊ आदिवासी समाज के लोगन मन आज भी अपन संस्कृति, परंपरा,रिति-रिवाज,खान- पान ल जीवित रखे हे। छत्तीसगढ़ राज्य के मूल संस्कृति, परंपरा, रिति-रिवाज,खान- पान, खेलकूद,तीज -तिहार ल बचाए बर पूर्व छत्तीसगढ़िया मुखिया भूपेश बघेल अब्बड़ सुघ्घर कामबूता करे हे,जेन ल मन के अंतरास ले भाजपा के नेता घलोक मन मना नई कर सकय…! एखर संग आज हमर छत्तीसगढ़ के आदिवासी मुखिया विष्णु देव साय घलोक ह आदिवासी समाज ल आघू बढ़ाए अऊ दुनिया भर म छत्तीसगढ़ के आदिवासी संस्कृति, परंपरा, रिति-रिवाज, खान- पान, खेलकूद ल लेके अब्बड़ सुघ्घर कामबूता कर डालिस,जेखर श्रेय मुखिया विष्णु देव साय के संगे संग आदिवासी विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ल जावत हे ,जेन ह करोड़ों रुपिया के लागत से छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर के अटल नगर म “छत्तीसगढ़ आदिवासी संग्रहालय” के निर्माण करिस। छत्तीसगढ़ राज्य ल बने 25 बछर होके हवै अऊ हमेशा हमर सरकार ह ईहां के संस्कृति, परंपरा,रिति-रिवाज, खान- पान, खेलकूद ल लेके कुछु न कुछु काम अपन स्तर म करिस हे फेर वरतमान मुखिया विष्णु देव साय के राज बस्तर, अंबिकापुर, जशपुर,कोरबा, गौरेला -पेंड्रा -मरवाही के संगे संग जिहां-जिहां आदिवासी समाज के लोगन हे ऊंहा -ऊंहा के संस्कृति, परंपरा, रिति-रिवाज, खान- पान, खेलकूद अऊ आदिवासी समाज से जुड़े हर कामकाज ल लेके रायपुर म “आदिवासी समाज के संग्रहालय” बनाए बर 14 अगस्त 2024 ले कुल लागत 909.58 लाख रुपिया म बनाए के सुरुआत प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के नेतृत्व म सुरु होईस अऊ ऐखर लोकार्पण 14 मई 2025 दिन बुधवार के मुखिया विष्णु देव साय ह करिस अऊ ईहां छत्तीसगढ़ के जम्मो आदिवासी समाज के लोगन के जीवन ल जीवंत करे के अब्बड़ सुघ्घर प्रयास करके “आदिवासी संग्रहालय” के माध्यम ले छत्तीसगढ़ के आदिवासी परिवार के हर चीज ल रखे गे हे,जेन ल देखे के बाद आईसन लगथे के हमन छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्र म हवन। निश्चित रुप ले “आदिवासी संग्रहालय” के माध्यम ले नई केवल छत्तीसगढ़िया मन ल बल्कि देस के कईयों राज्य के पर्यटक मन ल हमर छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज अऊ छत्तीसगढ़िया संस्कृति से अवगत होए बर ए संग्रहालय ह बड़ महत्वपूर्ण साबित होही..! छत्तीसगढ़ के आदिवासी अऊ छत्तीसगढ़िया संस्कृति, परंपरा, रिति-रिवाज, खान- पान, खेलकूद, कामकाज ल लेके “आदिवासी संग्रहालय” म जऊन तरीका से बनाए गे हे ओला देख के कोनों नई कह सकय के हमन कोनों संग्रहालय म हन बल्कि लोगन मन ईही गोठ बात कही कि हमन आदिवासी समाज बारे म नई जानत रहेन फेर आज ए संग्रहालय ले हम न ल आदिवासी समाज के बारे म सबों तरह के जानकारी मिल जाही। आदिवासी के “लाल बंगला” ले लेके महुआ के महत्व, बाजार,तांडी, साग भाजी, खान-पान, खेती-बाड़ी, कामकाज सबों बढ़िया तरीका से बताए गे हे। निश्चित रूप ले छत्तीसगढ़ के मुखिया विष्णु देव साय, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ल “आदिवासी संग्रहालय” लेके दुनिया भर म प्रचार- प्रसार करना चाही,जब जा के दुनिया भर म छत्तीसगढ़िया आदिवासी समाज के बारे म पता चल ही अऊ आदिवासी समाज के योगदान ल दुनिया म पहिचान मिल पाही। मयं खुद ए संग्रहालय के आदिवासी विकास के संयुक्त संचालक गायत्री नेताम बहिनी के संग म दर्शन करे हव, जेन ल देखे ले आईसन लगथे के मयं बस्तर म आदिवासी परिवार के बीच म हवव। निश्चित रूप ले ए संग्रहालय के निर्माण के सोच रख के छत्तीसगढ़ के आदिवासी परिवार ल दुनिया म पहिचान दिलाए के सोच रखवाईया विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, आयुक्त डॉ सारांश मित्तर, संचालक डॉ जगदीश सोनकर, संयुक्त संचालक गायत्री नेताम अऊ पूरा आदिम जाति कल्याण विभाग आदिवासी विकास विभाग ल ए संग्रहालय के निर्माण करें बर धन्यवाद देवत हव अऊ मुखिया विष्णु देव साय ल घलोक धन्यवाद, आभार व्यक्त करत हव के आदिवासी समाज ल लेके ए संग्रहालय के निर्माण ल पूरा करिस अऊ आदिवासी मुखिया विष्णु देव साय के एक कामबूता ल लेके नई केवल आदिवासी समाज बल्कि पूरा छत्तीसगढ़िया समाज ह कर्जदार रहई..!
अब मुखिया विष्णु देव साय ल हमर महतारी भासा छत्तीसगढ़ी ल लेके घलोक बर बढ़िया काम काज करना चाही,काबर के आज हमर छत्तीसगढ़ी भासा ल राजभासा के दर्जा मिल चुके हे फेर छत्तीसगढ़ी भासा म कोनो सरकारी काम-काज, पढ़ाई-लिखाई नई होत हवै। सिरतोन रुप ले कहव तौ छत्तीसगढ़ी भासा के अपनेच राज्य म कोनो पहिचान नई बन पाए हे तौ फेर छत्तीसगढ़ी भासा ल देस के आठवीं अनुसूची म कईसे सामिल करा पाबो..? आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से बिनती हवै के जऊन तरह से छत्तीसगढ़ आदिवासी संग्रहालय बना के हमर आदिवासी समाज के संस्कृति, परंपरा, रिति-रिवाज, खान-पान, खेलकूद, खेती-बाड़ी सबों तरह के कामकाज ल जीवंत रखे बर संग्रहालय के निर्माण करिस ओसने हमर महतारी भासा छत्तीसगढ़ी ल राष्ट्रीय स्तर म पहिचान दिलाए बर कामबूता करे…!