बिलासपुर/ तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की कांग्रेस राज में ही नहीं बल्कि भाजपा के विष्णु देव साय के राज में शोषित कर्मचारियों को समय के भीतर न्याय नहीं मिल पाने के कारण आज भाजपा सरकार की नीति को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं । प्रदेश के वर्तमान उप मुख्यमंत्री अरुण साव के कर्म स्थल बिलासपुर जिले के बिल्हा विकास खंड के पूर्व शिक्षा अधिकारी को ईमानदारी की इतनी बड़ी सजा मिली है कि आज उन्हें विभागीय जांच अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण न केवल विभागीय बल्कि सामाजिक और मानसिक तनाव से गुजरना पड़ रहा है। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग के पूर्व मंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह टेकाम, रविन्द्र चौबे के बाद भाजपा के पूर्व शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल भी विभागीय लापरवाही और मनमानी पर कोई कार्रवाई नहीं कर पाएर। वही पूर्व राज्यपाल बिस्वभूषण हरिचंदन से न्याय की गुहार लगाने के आठ महीने बाद भी राज्यपाल ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग को कार्रवाई करने का आदेश जारी किया लेकिन आज दिनांक तक न्याय नहीं मिल पाया। और आज उक्त शिक्षा अधिकारी न्याय पाने दर- दर की ठोकर खाने विवश हैं। छत्तीसगढ़ के वर्तमान मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री विष्णु देव साय के राज में स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है और विभाग के पीड़ित अधिकारी न्याय पाने के लिए स्कूल मुख्य मंत्री, सचिव, संचालक से लेकर राज्यपाल तक गुहार लगा चुके हैं बावजूद पीड़ित की गुहार को न सुन पाना निश्चित रुप से सरकार के लिए ही बहुत बड़ी शर्म की बात है। बिलासपुर जिले के बिल्हा के पूर्व बीईओ एम.एल.पटेल द्वारा अपने कार्यकाल में स्वीपरों द्वारा तनख्वाह वाले चेक में फर्जीवाड़ा करने के मामले पर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना ही इन्हें भारी महंगा पड़ गया और मामले पर विभागीय जांच में इस ईमानदार अधिकारी को किस आधार पर दोषी ठहराते हुए निलंबन किया गया और अब इनका वेतन रोकना समझ से परे है ..! वहीं विभागीय जांच कमेटी द्वारा इन पर यह भी आरोप लगाया गया था कि राशि रुपए 48,92,739 (अड़तालिस लाख ब्यान्बे हजार सात सौ उन्तालिस रुपए) को सुनियोजित तरीके से गबन करने के लिए ए.के.तिवारी (तत्कालीन लेखपाल) वर्तमान में सेवानिवृत्त लेखपाल के कार्यालय में अनुपस्थिति के दरम्यान इस कार्य में सुनील यादव का सहयोग देने के लिए कहा गया एवं इस प्रकार कार्य विभाजन से हटकर भी अन्य लिपिकों द्वारा कार्य लिया जाता था। इनके द्वारा पदीय दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता बरती गई। कार्यालयीन दस्तावेजों यथा प्रभार वितरण के आदेश, जांच अधिकारियों के प्रतिवेदन एवं प्रकरण में आरोपी दो स्वीपर रमेश निर्मलकर एवं अनिल चौहान तथा साक्ष्यकर्ता शिल्पा शर्मा सहायक ग्रेड-03 कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी बिल्हा के बयानों के आधार पर वित्तीय कार्यों का निष्पादन के अंतर्गत चेक बनाने का कार्य तत्कालीन लेखापाल अरुण कुमार तिवारी के द्वारा ही किया जाता था। उक्त दोनों स्वीपरो ने भी अपने बयान में यह दर्ज कराया है कि चेक बनाने, चेक वितरण करने एवं बैंक से पावती प्राप्त कर वापस लेने का कार्य अरुण कुमार तिवारी लेखापाल के द्वारा ही किया जाता था। अतः अरुण कुमार तिवारी तत्कालीन लेखापाल की अनुपस्थिति में सुनील यादव को सहयोग देने के लिए कहे जाने की पुष्टि कार्यालयीन दस्तावेजों के आधार पर नहीं होती है। इनके साथ ही उक्त शिक्षा अधिकारी पर यह भी आरोप लगाया गया कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में नियमित कर्मचारी होते भी सुनियोजित तरीके से बैंक चेक भेजने में नियमित में कर्मचारी से कार्य नहीं लिया गया बल्कि स्वीपरो का मानदेय से संबंधित चेक स्वीपरो, शैक्षिक समन्वयकों के माध्यम से बैंक को भेजा जाता था परंतु जो चेक स्वीपर अनिल चौहान एवं रमेश निर्मलकर के माध्यम से बैंक भेजा गया, उन्ही चेकों में काट-छाट कर राशि को सुनियोजित तरीके से राशि को बढ़ाया जाना पाया गया, फिर भी शासकीय चेक को बार-बार अंशकालीन स्वीपरों के माध्यम से वितरण किया जाना जानबूझकर लेखा नियमों का उल्लंघन एवं सुनियोजित तरीके से शासकीय राशि का गबन प्रमाणित करता है। उक्त आरोप पर जांच कमेटी ने जांच प्रतिवेदन में बताया कि आरोप प्रत्यक्ष रूप से अपचारी अधिकारी एम. एल. पटेल से संबंधित नहीं होना पाया गया, परंतु उक्त कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका अरुण कुमार तिवारी लेखापाल की पाई गई, जिनके द्वारा चेक बनाया जाना, वितरित किया जाना कार्यालयीन भृत्यों के होते हुए भी स्वीपरो के माध्यम से चेक बैंक में जमा करने हेतु अनिल चौहान एवं रमेश निर्मलकर को दिया जाना, जिससे चेक में अंकित राशि के अंकों में परिवर्तन कर अधिक राशि अपने स्वयं के खाते में उक्त दोनों स्वीपरो द्वारा जमा कराया गया। अरुण कुमार तिवारी लेखापाल एवं इन दोनों स्वीपरो को चेक दिए जाने का कार्य शांतिलाल साहू सहायक ग्रेड-03 एवं एन.पी. डाहिरे सहायक ग्रेड-02 के द्वारा दिया गया। इस प्रकार एम.एल. पटेल प्रत्यक्ष रूप से इस आरोप के प्रति प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार नहीं है। परंतु कार्यालय प्रमुख होने के नाते उनकी भी जवाबदारी होती है। वहीं इन पर यह भी आरोप लगाया गया कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी बिल्हा के पद पर पदस्थी के दौरान जांच समिति को खाता क्रमांक 10597647022 एवं खाता क्रमांक 3238857239 का स्टेटमेंट मांगे जाने पर कुल 7 पेज का स्टेटमेंट जांच समिति को उपलब्ध कराया गया, जबकि बैंक द्वारा उक्त दोनों खाता का बैंक स्टेटमेंट 354 पेज उपलब्ध कराया गया, इससे प्रतीत होता है कि आपके द्वारा तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया गया। इस संबंध में साक्ष्यों द्वारा किसी भी प्रकार का बयान दर्ज नहीं किया गया है। प्रारंभिक जांच अधिकारी द्वय कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर के द्वारा गठित जांच दल के जांच अधिकारी द्वय पी दासरथी प्राचार्य शा.उ.मा.वि. दगौरी एवं रजनीश अरोरा हाई स्कूल कौड़िया तथा कार्यालय संयुक्त संचालक बिलासपुर के द्वारा गठित जांच दल पी दासरथी प्राचार्य शा.उ.मा.वि. दगौरी एवं रजनीश अरोरा हाई स्कूल कौड़िया तथा कार्यालय संयुक्त संचालक एस.एल. खुटे वरी. परी. कार्यालय से नियुक्त संचालक बिलासपुर सी. पी. पांडेय कनि.लेखा परीक्षक एवं अन्य साक्ष्यों ने भी अनिभिज्ञयता प्रकट की है। वहीं इस पूरे मामले पर जांच कमेटी ने बताया कि अपचारी अधिकारी एम.एल. पटेल ने अपने प्रतिवाद में बताया कि प्रारंभिक जांच अधिकारियों ने आठ चेक जिनमें कूटरचना की गई थी, उससे संबंधित बैंक स्टेटमेंट की प्रति उन्हें उपलब्ध कराई गई थी। शेष अन्य पृष्ठ उपलब्ध न कराये जाने की कोई मंशा नहीं अपचारी द्वारा नहीं है। जिसके फलस्वरुप अपचारी कर उक्त आरोप आरोपित कर विभागीय जांच की जावे। अतः अपचारी उपरोक्त निष्कर्ष के आधार पर विभागीय जांच प्रारंभिक स्तर पर ही नस्तीबद्ध (समाप्त) करने की मांग की गई थी उक्त पूरे मामले पर बिल्हा के पूर्व बीईओ पटेल ने मुख्य मंत्री, विभागीय सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी,संचालक दिव्या मिश्रा को ज्ञापन सौंपकर न्यायसंगत कार्रवाई की मांग किए थे परन्तु तेरह महीने बीत जाने के बाद भी इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री और न ही स्कूल शिक्षा विभाग ने कोई निष्पक्ष कार्रवाई कर सके। जिससे आज बिल्हा के पूर्व विकास खंड शिक्षा अधिकारी एम.एल.पटेल को आर्थिक, मानसिक और सामाजिक तनाव से गुजरना पड़ रहा है। बहरहाल देखना है कि सर्वव्यापी की इस खबर पर कुंभकर्णी निंद्रा से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय,स्कूल शिक्षा सचिवालय जागते हैं या नहीं ? वहीं इस पूरे मामले की विस्तृत खबर सर्वव्यापी अपनी आगामी अंकों में प्रकाशित करेंगे…!