तरुण कौशिक/संपादक/सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा लगातार मंत्री मंडल विस्तार की बातें की जाती रही है और बीते कुछ दिनों पहले दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा था कि जल्द ही मंत्री मंडल का विस्तार हो जाएगा। जिसे लेकर आज केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के आगमन पर इस सप्ताह मंत्री मंडल विस्तार होने की बात कही जा रही है अगर इस सप्ताह मंत्री मंडल का विस्तार नहीं हो पाया तो भगवान ही जाने की छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कब इस दिशा में निर्णय लेंगे। छत्तीसगढ़ में मंत्री मंडल विस्तार और शेष बचे निगम, मंडल, आयोग और बोर्ड में नियुक्ति को लेकर पिछले महीने से सुगबुगाहट सुनने को मिलती आ रही है और जब जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय दिल्ली गये या फिर छत्तीसगढ़ में भाजपा संगठन की बड़ी बैठक हुई तब तब मंत्री मंडल विस्तार एक दो दिन के भीतर होने चर्चा होती रही है लेकिन अब तक मंत्रीमंडल विस्तार नहीं हो सकता और जो मंत्री बनने की लाइन में खड़े हुए हैं उनकी सब्र भी टूटने लगा है और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को सबसे कमजोर मुख्यमंत्री के रुप गिना जा रहा है क्योंकि इनके डेढ़ साल के कार्यकाल में अब तक पूर्ण मंत्री मंडल विस्तार, भाजपा संगठन में फेरबदल और संसदीय सचिव की पदस्थापना के साथ ही कुछ शेष बचे निगम, मंडल, आयोग और बोर्ड में नियुक्ति नहीं किए जाने को लेकर न केवल भाजपाई नाराज दिख रहे हैं बल्कि ब्यूरोक्रेसी में यही चर्चा है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ठोस निर्णय लेने में असमर्थ हैं और छत्तीसगढ़ के एक वरिष्ठ भाजपा नेता की कठपुतली के रुप में कामकाज को कर रहे हैं। जिसके कारण मंत्री मंडल विस्तार के साथ संसदीय सचिव, शेष बचे निगम, मंडल,आयोग, बोर्ड और जिन जिन भाजपा संगठन के पदाधिकारियों को राज्य सरकार में नियुक्ति प्रदान की है, उसके पश्चात अब तक छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन में बदलाव न होने से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया जा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का यह विशेषाधिकार में शामिल हैं कि वह किसे मंत्री, संसदीय सचिव और निगम, मंडल, आयोग बोर्ड में नियुक्ति करके जिम्मेदारी दे और इसी कारण मुख्यमंत्री से जुड़े वरिष्ठ अफसर भी मुख्यमंत्री को इस दिशा में कोई सलाह नहीं दे रहे हैं । जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से जुड़े अफसरों को पता है कि उक्त कार्य न होने के कारण सरकार की फजीहत हो रही है। यही नहीं संगठन में बैठे हुए वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी यह पता है लेकिन संगठन के पदाधिकारी भी विष्णु देव साय की कार्यप्रणाली को लेकर मौन साध कर बैठे है। जिससे माना जा रहा है कि उक्त निर्णय न होने के कारण मुख्यमंत्री की छवि छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच छवि धूमिल हो रही है और यह एक मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता के इशारे पर होना बताया जा रहा है। वहीं आज ही छत्तीसगढ़ की पावन भूमि पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे हैं जो आज विभिन्न समारोह में शामिल हुए हैं। संभावना जताई जा रही है कि देर रात मुख्यमंत्री और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी अमित शाह से मिलकर मंत्री मंडल विस्तार, संसदीय सचिव और शेष बचे निगम मंडल आयोग बोर्ड में नियुक्ति कराने को लेकर चर्चा करते हुए आज ही इस मुद्दे पर फैसला करेंगे और इस बार अमित शाह के दिल्ली लौटने के बाद कोई निर्णय नहीं आता है तो यही समझा जाएगा कि इस विधानसभा सत्र में मंत्री मंडल विस्तार नहीं होगा और न ही संसदीय सचिव, शेष बचे निगम, मंडल, आयोग, बोर्ड में नियुक्ति की जाएगी। बहरहाल देखना है कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में यह निर्णय हो पाता है या नहीं..?