हिंदी विश्‍वविद्यालय में राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति अभिविन्‍यास और संवेदनशीलता कार्यक्रम उद्घाटित…जीवन जीने का नजरिया देती है शिक्षा नीति : प्रो. कुमुद शर्मा।

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तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र में यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) द्वारा राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति अभिविन्‍यास और संवेदनशीलता कार्यक्रम के उद्घाटन में अध्‍यक्षीय उद्बोधन देते हुए कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति जीवन जिने का नजरिया देती है। यह शिक्षा नीति भारत केंद्रीत है। इस शिक्षा नीति के अंतर्गत विद्यार्थी भारत के सांस्‍कृतिक आयामों से परिचित हो सकेंगे और वे भारतीय ज्ञान परंपरा के संवाहक बनेंगे। उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति एक क्रांतिकारी कदम है और इस नीति से विद्यार्थी भारत की सांस्‍कृतिक पहचान से परिचित होंगे। मंगलवार 01 जुलाई को ऑनलाइन आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन महादेवी वर्मा सभागार में किया गया। कार्यक्रम का प्रास्‍ताविक साहित्‍य विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता तथा कार्यक्रम के निदेशक प्रो. अवधेश कुमार ने किया। उन्‍होंने कहा कि यह 08 वाँ कार्यक्रम है, जिसमें 17 राज्यों के 200 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए हैं। वर्ष भर में इसके 24 कार्यक्रम आयोजित होने वाले हैं। उद्घाटन के बाद गुजरात विश्‍वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीरजा गुप्ता ने भारतीय ज्ञान प्रणाली व बहुभाषावाद विषय पर तथा दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्‍वविद्यालय, गया के डॉ. तरुण कुमार त्‍यागी ने उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों में राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति का कार्यान्‍वयन : प्राथमिकता व चिंताएं पर व्‍याख्‍यान दिए।कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा का स्‍वागत प्रो. अवधेश कुमार एवं कार्यक्रम के समन्‍वयक एवं उपनिदेशक डॉ. राजेश लेहकपुरे ने पुष्‍पगुच्‍छ देकर किया। कार्यक्रम का प्रारंभ कुलगीत तथा मां सरस्‍वती के फोटो पर माल्‍यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर सहायक निदेशक डॉ. संदीप कुमार वर्मा, डॉ. कृष्‍ण चंद पाण्‍डेय, डॉ. नरेंद्र पाल, सहायक प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार, हिंदी अधिकारी राजेश यादव, जनसंपर्क अधिकारी बी. एस. मिरगे उपस्थित थे।कार्यक्रम में आगामी 07 दिनों में समग्र एवं बहुविषयक शिक्षा, शैक्षणिक नेतृत्व, शासन और प्रबंधन, उच्च शिक्षा और समाज, शोध और विकास, कौशल विकास, छात्र विविधता और समावेशी शिक्षा, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, संस्थान को स्वायत्तता और छात्रों को विकल्प, पाठ्यक्रम, विकास, शिक्षाशास्त्र और मूल्यांकन इन विषयों पर मार्गदर्शन किया जाएगा।


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