विकास नंद/सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग ने सभी लोकप्राधिकारियों (कार्यालय प्रमुखों) को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे अपने अधीनस्थ तत्कालीन अथवा वर्तमान जनसूचना अधिकारियों को निर्देशित करें कि आयोग द्वारा द्वितीय अपील की सुनवाई हेतु भेजे गए नोटिस का जवाब 30 दिनों के भीतर बिंदुवार और दस्तावेजों सहित प्रस्तुत करें।आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह उत्तर पंजीकृत डाक के माध्यम से राज्य सूचना आयोग को भेजना अनिवार्य होगा। साथ ही जवाब प्रस्तुत करते समय संबंधित जनसूचना अधिकारी का नाम, पदनाम, कार्यकाल एवं वर्तमान पदस्थापना की जानकारी का उल्लेख भी अनिवार्य रूप से किया जाए।राज्य सूचना आयोग ने यह भी कहा है कि कई मामलों में तत्कालीन अथवा वर्तमान जनसूचना अधिकारियों से समय पर जवाब नहीं मिलने के कारण द्वितीय अपील की सुनवाई में अनावश्यक विलंब हो रहा है। इस स्थिति से बचने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे सुनवाई के दौरान सभी अभिलेख एवं संबंधित नस्ती के साथ स्वयं उपस्थित रहें। यदि किसी अपरिहार्य कारणवश वे उपस्थित नहीं हो सकते, तो उनकी ओर से ऐसा प्रतिनिधि भेजा जाए जिसे प्रकरण की पूरी जानकारी हो और जो आवश्यक दस्तावेजों एवं उत्तर के साथ आयोग के समक्ष प्रस्तुत हो सके।आयोग ने स्पष्ट किया है कि सुनवाई में भेजे गए प्रतिनिधि के पास अधिकृत प्राधिकार पत्र होना अनिवार्य होगा, अन्यथा उसकी उपस्थिति अमान्य मानी जाएगी। प्रतिनिधि द्वारा प्रस्तुत उत्तर को ही जनसूचना अधिकारी का उत्तर माना जाएगा।इसके साथ ही आयोग ने निर्देश दिया है कि आयोग या अपीलकर्ता के साथ पत्राचार करते समय प्रकरण क्रमांक, वर्ष और सुनवाई की तिथि के साथ-साथ जनसूचना अधिकारी का नाम, पदनाम एवं पदस्थापना स्थल स्पष्ट रूप से अंकित किया जाए। यदि उक्त निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20(1) एवं 20(2) के तहत अर्थदण्ड अथवा अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सकती है।राज्य सूचना आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि वे सुनवाई प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने में सहयोग करें।