विकास नंद/सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों और महिलाओं के लिए भेजी गई सामग्रियों की गुणवत्ता पर उठे सवालों के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
मंत्री के निर्देश पर गठित राज्य स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर छह सप्लाई एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।जांच समिति में संयुक्त संचालक (वित्त), सीएसआईडीसी और जीईसी रायपुर के तकनीकी प्रतिनिधियों सहित दो तकनीकी निरीक्षण एजेंसियों—SGS इंडिया और IRCLASS सिस्टम्स के विशेषज्ञ शामिल थे। समिति ने रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, जशपुर, सरगुजा और जांजगीर-चांपा जिलों में जाकर सामग्रियों का गहन निरीक्षण किया।रिपोर्ट में कई खामियों की पुष्टि हुई, जैसे कि टेबल का अधूरा असेंबली, अनाज कोठियों का बीआईएस मानकों पर खरा न उतरना, स्टील ट्रे की माप और वजन में भिन्नता तथा तवा की निम्न गुणवत्ता। इसके आधार पर मेसर्स नमो इंटरप्राइजेस, आयुष मेटल, अर्बन सप्लायर्स, मनीधारी सेल्स, ओरिएंटल सेल्स और सोनचिरैया कॉर्पोरेशन को जेम पोर्टल से प्रतिबंधित कर भविष्य में शासकीय आपूर्ति से वंचित कर दिया गया है।विभाग ने यह स्पष्ट किया कि खराब सामग्री के लिए किसी सप्लायर को भुगतान नहीं किया गया और दोषपूर्ण सामग्री वापस लेकर मानक के अनुसार आपूर्ति कराई गई। वर्ष 2024-25 में कुल 23.44 करोड़ रुपये की सामग्री खरीदी गई थी, जिसे कुछ मीडिया रिपोर्टों में गलत तरीके से 40 करोड़ बताया गया था। विभाग ने इसे भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की “जीरो टॉलरेंस” नीति के अनुरूप की गई यह कार्रवाई राज्य सरकार की पारदर्शिता और दृढ़ प्रशासनिक इच्छाशक्ति को दर्शाती है। स्वयं मुख्यमंत्री कई बार यह दोहरा चुके हैं कि बच्चों, महिलाओं और गरीबों से जुड़ी सेवाओं में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा, “हमारी प्राथमिकता है कि आंगनबाड़ी केन्द्रों तक केवल सुरक्षित, मजबूत और गुणवत्तापूर्ण सामग्री ही पहुंचे। इस मामले में दोषियों के खिलाफ त्वरित व ठोस कार्रवाई कर यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”यह कार्रवाई राज्य शासन की प्रतिबद्धता का प्रमाण है कि समाज के सबसे कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा सर्वोपरि है।