तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
बिलासपुर से कोरबा, जांजगीर और रायगढ़ को जोडऩे वाली सीपत-बलौदा मुख्य सडक़ अब यात्रियों के लिए रास्ता नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं का मैदान बन गई है। सीपत से लीलागर नदी तक की 14 किमी सडक़ इस कदर जर्जर हो चुकी है कि हर कदम पर जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। गड्ढों से पटी सडक़ पर दोपहिया वाहनों का चलना मानो मौत को दावत देने जैसा है। खांडा के कोलवाशरी मोड़ और धनिया के भौराडीह चौक जैसे कई खतरनाक मोड़ हादसों का गढ़ बन चुके हैं। भारी वाहनों से लेकर श्रद्धालुओं की गाडिय़ां तक रोज इस उबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।11 साल पहले बना था मार्ग, तब से मरम्मत के नाम पर सन्नाटाइस मार्ग का निर्माण वर्ष 2014 में 17.60 लाख रुपये की लागत से हुआ था। लेकिन इसके बाद से मरम्मत के नाम पर न तो कोई पहल हुई, न ही कोई ठोस काम। लगातार भारी वाहनों की आवाजाही से सडक़ की हालत अब पूरी तरह बदहाल है।
‘कोई नहीं देखता… रोज खतरे से लड़ते हैं’:
स्थानीय व्यापारी बोले— डर लगता है गाड़ी निकालते वक्तजांजगीर जिले के चंदनिया निवासी सब्जी व्यवसायी हरिशंकर लहरे ने कहा कि हर दूसरे दिन बिलासपुर मंडी से माल लेकर लौटता हूं, लेकिन सडक़ की हालत देखकर हमेशा डर बना रहता है कि कहीं गाड़ी पलट न जाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने कई वाहन हादसे में उलटते देखे हैं।
दरगाह के श्रद्धालु भी बेहाल, हर रोज गुजरते हैं टूटी सडक़ सेसीपत से 10 किमी दूर स्थित लुतरा शरीफ की दरगाह तक रोज सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें भी इसी जर्जर रास्ते से गुजरना पड़ता है। कई श्रद्धालु चोटिल हो चुके हैं। लोग पूछ रहे हैं कि जब यह सडक़ धार्मिक और व्यावसायिक दृष्टि से इतनी अहम है, तो अब तक ध्यान क्यों नहीं दिया गया?22 करोड़ का प्रस्ताव शासन के पाले में, फिलहाल केवल ‘जुगाड़ू’ मरम्मतलोक निर्माण विभाग बिलासपुर (क्र.1) के कार्यपालन अभियंता सी.एस. विंध्यराज ने जानकारी दी कि सीपत से लीलागर तक 14 किमी नई सडक़ के लिए 22 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।फिलहाल, जिन जगहों पर हालत बेहद खराब है, वहां अस्थायी सुधार कार्य कर चलने लायक बनाया जाएगा।क्षेत्र की जनता, व्यापारी और श्रद्धालु अब प्रशासन से सिर्फ आश्वासन नहीं, कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सवाल है कि क्या यह सडक़ किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है या अब शासन-प्रशासन नींद से जागेगा?