तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
एक प्रेरणादायी दस्तावेज, खेल और संकल्प की साझी कहानी —“जब तक लक्ष्य स्पष्ट न हो, तब तक कदमों में वह आत्मविश्वास नहीं आता, जो इतिहास रचते हैं।”यह पंक्तियाँ अक्षरशः चरितार्थ होती हैं छत्तीसगढ़ की होनहार कराटे प्रशिक्षिका कुमारी आरती वर्मा पर, जिन्होंने देश में खिलाड़ियों की बदहाली और खेलों की उपेक्षा के विरुद्ध एक अनूठा और अत्यंत प्रेरक कदम उठाया है।आरती वर्मा, जो कि रेन सीन कान कराटे छत्तीसगढ़ की प्रशिक्षिका हैं तथा तिल्दा विकासखंड के साशाहोली ग्राम से संबंध रखती हैं, ने ११० किलोमीटर लंबी पदयात्रा आरंभ की है। यह यात्रा केवल शरीर की दृढ़ता नहीं, बल्कि आत्मा की तपस्या है। उनका उद्देश्य है — देश में खिलाड़ियों की दुर्दशा को उजागर करना और खेलों को समाज में उचित स्थान दिलाना।यह पदयात्रा पवित्र सावन मास मे अजगैबीनाथ नाथ धाम (बिहार) से पवित्र जल लेकर आरंभ की गई है, जिसे वे झारखंड के अत्यंत पावन बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) में भोले बाबा को अर्पित करेंगी। यह यात्रा एक प्रतीक है — लगन, आस्था और संघर्षशील खिलाड़ियों की भावना का।आरती वर्मा केवल एक खिलाड़ी नहीं हैं, वे जनजागरण की एक चलती-फिरती मशाल हैं। उन्होंने अपने तपस्वी स्वभाव से यह सिद्ध किया है कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, अपितु सामाजिक परिवर्तन का औजार भी हो सकते हैं।रेन सीन कान कराटे छत्तीसगढ़ की संरचना में उनका योगदान अनुपम है — जहाँ वे ग्रामीण अंचलों में विशेषकर बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देकर उन्हें सशक्त बना रही हैं।उनकी इस पहल की गूंज न केवल छत्तीसगढ़ या भारतवर्ष में, बल्कि विदेशों तक भी पहुँची है। कई अंतरराष्ट्रीय कराटे संगठनों ने उनकी इस पहल को “आत्मबल और आत्मत्याग की पदयात्रा” की संज्ञा दी है।उनकी संकल्पबद्धता को लेकर जापान, कोरिया, तथा यूरोप के कराटे संगठनों द्वारा भी प्रशंसा-पत्र प्रेषित किए गए हैं — यह प्रमाण है कि एक छोटे से गाँव की बेटी आज वैश्विक खेल जगत में प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।संपूर्ण रेन सीन कान कराटे छत्तीसगढ़ परिवार ने कुमारी आरती वर्मा को इस महाअभियान हेतु सादर शुभकामनाएँ एवं अभिनंदन प्रेषित किया है।संस्था के वरिष्ठ प्रशिक्षकगण एवं समर्पित कराटे परिवार इस यज्ञात्मक प्रयास में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। सभी का विश्वास है कि यह प्रयास न केवल खेलों को मुख्यधारा में लाने का माध्यम बनेगा, बल्कि शासन और समाज को भी नई दिशा देगा।आरती वर्मा की यह साहसिक पदयात्रा युवाओं के लिए एक जीवंत प्रेरणा बन चुकी है। जब तक खेल को उसका समुचित सम्मान और खिलाड़ियों को उनका अधिकार नहीं प्राप्त होता, तब तक आरती जैसी बेटियाँ अपने संकल्प से समाज को झकझोरती रहेंगी।यह केवल यात्रा नहीं, यह राष्ट्र की आत्मा को जाग्रत करने का एक महायज्ञ है।आरती वर्मा, आपने जो कदम उठाया है — वह न केवल आज के भारत, बल्कि आने वाले भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। इस ऐतिहासिक पदयात्रा पर आधारित वृत्तचित्र और प्रेरणाप्रद पुस्तिका के निर्माण का प्रस्ताव रेन सीन कान कराटे छत्तीसगढ़ द्वारा दिया गया है, ताकि यह अभियान केवल एक क्षणिक समाचार न बनकर, सदियों तक प्रेरणा का दीपक बनकर जलता रहे।