तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार के कार्यकाल को 19 महीने पूरे होने को हैं, लेकिन आमजन के बीच यह सवाल गहराता जा रहा है कि आखिर राज्य की कमान कौन चला रहा है। राजनीतिक रूप से अनुभवी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कार्यशैली और निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। शासन-प्रशासन पर पकड़ की कमी और अफसरशाही पर नियंत्रण न होने के कारण सरकार की साख लगातार गिरती जा रही है।पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल की तुलना में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की नेतृत्व क्षमता को कमजोर माना जा रहा है। उनके सचिवालय में पदस्थ अफसरों की निष्क्रियता और नीतिगत सलाह में दिलचस्पी न लेना, सरकार की गिरती छवि के प्रमुख कारणों में शामिल है।
ऐसे माहौल में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जो डॉ. रमन सिंह के शासनकाल में भी सचिव पद पर रह चुके हैं, सरकार की डूबती नैया को पार लगाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। केंद्र सरकार से प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उन्हें छत्तीसगढ़ भेजा गया और मुख्यमंत्री का प्रमुख सचिव बनाया गया। उद्योगों के राज्य में आगमन से लेकर नीतिगत फैसलों में उनकी सक्रिय भूमिका साफ दिख रही है।
हालांकि राज्य के मंत्रीगण अब तक अपने-अपने विभागों में कोई ठोस पहल नहीं कर पाए हैं, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है। सरकार के भीतर यह भी चर्चा है कि एक वरिष्ठ भाजपा नेता सरकार के परदे के पीछे से संचालन में सक्रिय हैं, जिससे मुख्यमंत्री की निर्णय क्षमता और नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं।
प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने हाल ही में कैबिनेट बैठक में अधूरी तैयारी के साथ आने वाले सचिवों पर नाराजगी जताई थी और उन्हें पत्र लिखकर जवाबदेही तय की थी। यह स्पष्ट संकेत है कि सुबोध अब प्रशासनिक प्रणाली में कसावट लाने के मूड में हैं। संचालनालय, जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और अन्य उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी उन्हें सख्ती से निगरानी रखने की आवश्यकता है।
राज्य सरकार की योजनाएं जनता तक सही ढंग से नहीं पहुंच रही हैं। जिम्मेदार अधिकारी कुर्सियों पर बैठते ही स्वयं को सर्वशक्तिमान समझने लगे हैं, जिससे सरकार की छवि और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंच रहा है।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को अब यह समझने की जरूरत है कि केवल राजनीतिक अनुभव से सरकार नहीं चलती, बल्कि प्रशासनिक सलाह और सशक्त टीम वर्क की भी उतनी ही जरूरत होती है।
ऐसे में प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह को सलाहकार की भूमिका में अधिक सक्रिय कर हर नीतिगत और प्रशासनिक निर्णय में उनसे मार्गदर्शन लेना आवश्यक हो गया है।यदि समय रहते सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो आगामी चुनावों में भाजपा की वापसी की संभावना पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
सरकार की छवि को संवारने और जनविश्वास अर्जित करने के लिए सख्त निर्णय और असरदार प्रशासनिक कार्रवाई की सख्त आवश्यकता है।