मंत्रालय में चपरासी की पदोन्नति के नियमों में संशोधन से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में आक्रोश, डिप्टी कलेक्टरों पर मनमानी का आरोप।

Share Now

तरूण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश क्रमांक ESTB – 103/18/2025-GAD-8, दिनांक 11 जुलाई 2025, ने प्रदेश के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के बीच गहरी नाराज़गी और असंतोष को जन्म दे दिया है। यह आदेश 20 जून 2025 को प्रकाशित किया गया था, जिसमें कनिष्ठ सचिवालय सहायक (सहायक ग्रेड-3) के 25% पदों को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति के माध्यम से भरने का प्रावधान किया गया है।हालांकि, इस पदोन्नति के लिए जो नई शर्तें रखी गई हैं, वे कर्मचारियों के लिए कहीं अधिक कठोर और अव्यवहारिक मानी जा रही हैं। नये नियम के अनुसार केवल वही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पदोन्नति के पात्र होंगे जो –1. किसी मान्यता प्राप्त शिक्षा मंडल से 10+2 परीक्षा उत्तीर्ण हों,2. और छत्तीसगढ़ शीघ्रलेखन-मुद्रालेखन परीक्षा परिषद या समकक्ष संस्था से हिंदी या अंग्रेजी में 5000 डिप्रेशन/घंटा की टाइपिंग गति का प्रमाण पत्र रखते हों।पूर्व नियम अधिक सरल और व्यवहारिकपूर्व में यह व्यवस्था थी कि 10+2 उत्तीर्ण चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पांच वर्षों की सेवा के बाद सहायक ग्रेड-3 पद पर पदोन्नति के पात्र होते थे। इसके बाद विभागीय परीक्षा में सफल होने की शर्त थी, और असफल होने की स्थिति में केवल वार्षिक वेतनवृद्धि रोकी जाती थी। लेकिन अब कंप्यूटर टाइपिंग की बाध्यता ने पदोन्नति की राह और कठिन कर दी है।डिप्टी कलेक्टरों पर आरोप, कर्मचारी बोले – ‘मनमानी कर रहे हैं अधिकारी’कर्मचारियों का आरोप है कि कुछ डिप्टी कलेक्टरों द्वारा अपने आकाओं को खुश करने की होड़ में जल्दबाज़ी में ऐसा संशोधित आदेश पारित किया गया है, जिससे चपरासी जैसे छोटे पद पर कार्यरत कर्मचारियों को भारी मानसिक व प्रशासनिक दबाव में डाला जा रहा है। ये अधिकारी कथित रूप से ‘आईएएस रिवार्ड लिस्ट’ में स्थान पाने की महत्वाकांक्षा में कर्मचारियों के हितों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बोले – ‘हमें पीछे धकेलने की साज़िश’कई कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले दिनों अखबारों में जिस तरह से चपरासी से उप सचिव बनने की खबरें आईं, उसके बाद इस पूरी प्रक्रिया को बदनाम करने की एक सोची-समझी रणनीति के तहत यह नया नियम थोपा गया है।संघ की मांग – वापस लिया जाए आदेशचतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संगठनों ने इस आदेश को जल्द से जल्द वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि ई-ऑफिस की सुविधा को लागू करने के नाम पर टाइपिंग की अनिवार्यता थोपना अव्यावहारिक है और इससे हजारों कर्मचारियों का भविष्य प्रभावित होगा।समाप्त(यदि इस समाचार के संदर्भ में कोई कर्मचारी या संगठन अपना पक्ष रखना चाहता है, तो वे इस समाचार पत्र के संपादक से संपर्क कर सकते हैं।)


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!