संवाददाता/ रायपुर/
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग कार्यालय रायपुर में आज आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक, सदस्य लक्ष्मी वर्मा, सरला कोसरिया ओजस्वी मंडावी एवं दीपिका शोरी की उपस्थिति में महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई की गई। विभिन्न प्रकरणों में महिलाओं को न्याय दिलाने तथा परिवारों को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
सुनवाई के दौरान एक संवेदनशील प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि उसका पति पिछले छह माह से उसे छोड़कर दूसरी महिला के साथ अवैध संबंध में रह रहा है और उसे तलाक देने की धमकी दे रहा है।
आयोग को जानकारी मिली कि उक्त महिला तलाकशुदा है और उसके माता-पिता ने भी उसे त्याग दिया है। महिला की सुरक्षा व सुधार हेतु आयोग ने उसे रायपुर के नारी निकेतन भेजे जाने का आदेश दिया। साथ ही उसे सख्त समझाइश दी गई कि वह आवेदिका और उसके पति के पारिवारिक जीवन में कोई दखल न दे। दोनों पक्षों के बीच सुलह के बाद ही प्रकरण को नस्तीबद्ध किया जाएगा।
इसी प्रकरण में आवेदिका ने यह भी बताया कि उसके पति ने उनके बच्चों को अनाथालय में छोड़ दिया था, जिन्हें वह वापस ले चुकी है और खुद मेहनत-मजदूरी कर पालन-पोषण कर रही है।
आयोग ने पक्षों को समझाइश दी कि वे आपसी सहमति से सुलहनामा तैयार करें या फिर न्यायालयीन प्रक्रिया जारी रखें।एक अन्य मामले में पति-पत्नी के बीच समझौता करवाते हुए आयोग ने पति को निर्देशित किया कि वह अपनी पत्नी और बच्चों को अपने साथ रखे और बच्चों की शिक्षा एवं देखभाल की जिम्मेदारी निभाए।
पत्नी की आपत्ति थी कि वह शहर में पली-बढ़ी है और गांव में खेती नहीं कर सकती, जिसे समझते हुए पति ने सहमति जताई कि वह परिवार को अपने पास रखेगा।
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने आयोग को बताया कि वह कुटुम्ब न्यायालय रायपुर से 10 हजार रुपये मासिक भरण-पोषण का आदेश प्राप्त कर चुकी है लेकिन उसे अब तक राशि नहीं मिली है।
मामला पहले से ही कुरूद न्यायालय में लंबित है, ऐसे में आयोग ने स्पष्ट किया कि इस पर सुनवाई संभव नहीं है। आवेदिका को सलाह दी गई कि वह अपने पति के खिलाफ न्यायालय में भरण-पोषण की वसूली हेतु याचिका दायर करे।महिला आयोग द्वारा की गई इन सुनवाइयों से न केवल पीड़ित महिलाओं को राहत मिली बल्कि कई परिवारों को टूटने से बचाने की दिशा में सकारात्मक पहल हुई है।