महिला आयोग में सुनवाई: मानव तस्करी की आशंका, भरण-पोषण और दूसरी शादी जैसे मामलों में हुए गंभीर निर्णय।

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विकास नंद/ सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग कार्यालय में आज महिला उत्पीड़न से जुड़े कई संवेदनशील मामलों की सुनवाई हुई। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक एवं सदस्यों सरला कोसरिया, लक्ष्मी वर्मा, ओजस्वी मंडावी एवं दीपिका शोरी की उपस्थिति में मामलों की गहराई से जांच की गई और तत्कालीन निर्णय लिए गए।

🔹 मानव तस्करी की आशंका, जांच के आदेश एक बेहद गंभीर मामले में एक महिला ने शिकायत की कि उसकी 22 वर्षीय पुत्री को कुछ लोगों ने अपने घर में जबरन रखा है और मिलने से भी रोका जा रहा है। उसने यह भी बताया कि अनावेदक पक्ष द्वारा यह झूठ फैलाया गया कि उसकी बेटी समलैंगिक है। महिला ने आरोप लगाया कि उन लोगों के घर में 6-7 महीनों में अलग-अलग लड़कियाँ आती-जाती हैं, जो मानव तस्करी की ओर संकेत करता है।

आयोग ने इस मामले को गंभीर मानव तस्करी की आशंका मानते हुए पुलिस जांच और आवश्यकता पड़ने पर साइबर क्राइम जांच के निर्देश दिए। युवती को नारी निकेतन में सुरक्षा के मद्देनजर रखा गया है, और सखी प्रशासिका रायपुर को मेडिकल प्रशिक्षण की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए।

🔹 विधवा महिला को राहत: 10 किलो चांदी और दुकान देने पर सहमति एक अन्य मामले में महिला ने अपने पति की आगजनी में मृत्यु के बाद बच्चों के पालन-पोषण को लेकर कठिनाइयाँ बताईं। आयोग की समझाइश पर अनावेदक (ससुर) ने 10 किलो चांदी एवं एक दुकान देने की सहमति दी, जिससे महिला आत्मनिर्भर होकर व्यापार कर सके। इस प्रकरण को फिलहाल निगरानी में रखा गया है।

🔹 शिक्षक पति से पीड़ित महिला को मिलेगा ₹15,000 मासिक भरण-पोषण बलौदाबाजार में पदस्थ एक शिक्षक द्वारा शराब पीकर मारपीट और चरित्रहनन की शिकायत पर आयोग ने हस्तक्षेप किया।

अनावेदक को आयोग ने समझाइश दी, जिसके बाद वह आवेदिका को प्रति माह ₹15,000 भरण-पोषण देने के लिए तैयार हुआ। मामले की निगरानी आयोग के काउंसलर द्वारा की जाएगी।

🔹 बिना तलाक के दूसरा विवाह: शिक्षक पर होगी विभागीय जांचएक और गंभीर प्रकरण में महिला ने बताया कि उसके पति ने बिना तलाक लिए दूसरी शादी कर ली है। दोनों विवाहों से कुल पांच संतानें हैं। आयोग के समक्ष जब अनावेदक से पूछा गया तो उसने दूसरी पत्नी और संतान को पहचानने से इनकार कर दिया, परंतु बर्थ सर्टिफिकेट में उसका नाम दर्ज होने से सच्चाई सामने आ गई।

आयोग ने जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर मुंगेली को पत्र लिखकर अनावेदक की सर्विस बुक की प्रमाणित प्रति मंगवाने और दूसरी महिला को पुलिस अधीक्षक द्वारा आगामी सुनवाई में उपस्थित कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि आवेदिका को न्याय मिल सके।—

इन सभी मामलों में आयोग ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे, और कानूनी प्रक्रिया के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा की जा रही यह सक्रिय पहल पीड़ित महिलाओं के लिए एक मजबूत सहारा बनकर उभरी है।


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