विकास नंद/सर्वव्यापी/
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि विकसित भारत 2047 के संकल्प को पूरा करने के लिए समाज के हर वर्ग को आत्मनिर्भर बनाना अनिवार्य है, विशेषकर दिव्यांगजनों को। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित समाज कल्याण विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि प्रदेश में शत-प्रतिशत दिव्यांगजनों को कौशलयुक्त बनाकर उन्हें स्वावलंबी बनाने की दिशा में कार्ययोजना बनाकर त्वरित क्रियान्वयन किया जाए।
मुख्यमंत्री ने लंबित वृद्धजन और दिव्यांगजन पेंशन प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के निर्देश देते हुए कहा कि यह कार्य सेवा-भावना और संवेदनशीलता के साथ प्राथमिकता में किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बुजुर्गों, दिव्यांगों और निराश्रितों के कल्याण में किसी भी तरह की लापरवाही सहन नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वृद्धाश्रमों, अनुदान प्राप्त संस्थाओं एवं पुनर्वास केंद्रों की व्यवस्थाएं बेहतर की जाएं और दिव्यांगजनों को उनकी रुचि व क्षमता के अनुसार मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण देकर स्व-रोजगार से जोड़ा जाए।
समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर पाए जाने वाले बेसहारा व घुमंतू दिव्यांगों के लिए पुनर्वास की ठोस व्यवस्था हो, और विभागीय हेल्पलाइन का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने पेंशन प्रकरणों के भौतिक सत्यापन पर जोर देते हुए पात्र हितग्राहियों को वरीयता देने की बात कही।
मुख्यमंत्री साय ने तृतीय लिंग समुदाय के पंजीयन, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड जैसे लाभों को तेजी से प्रदान करने एवं दिव्यांगजनों के UDID पंजीयन और मेडिकल बोर्ड प्रमाण-पत्र वितरण की प्रक्रिया को गति देने के निर्देश भी दिए।बैठक में अधिकारियों ने बताया कि बीते वर्ष 137 विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 7669 दिव्यांगों का परीक्षण हुआ और 6671 को कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण प्रदान किए गए। इससे उनके जीवन में आशा और आत्मविश्वास का संचार हुआ है।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, सचिव पी. दयानंद, राहुल भगत, समाज कल्याण सचिव भुवनेश यादव, संचालक रोक्तिमा यादव सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार की प्रतिबद्धता यह है कि कोई भी जरूरतमंद बिना सहारे के न रहे।