तरूण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क विभाग द्वारा मंत्रालय प्रवेश पास जारी करने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर भेदभाव के आरोप सामने आ रहे हैं। अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों और संपादकों को ही मंत्रालय में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है, जबकि प्रदेश में सक्रिय अन्य दैनिक, साप्ताहिक एवं मासिक समाचार पत्रों के पत्रकारों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है।
इससे प्रदेश के पत्रकारों में गहरा आक्रोश पनप रहा है।
जानकारी के अनुसार, जनसंपर्क विभाग और छत्तीसगढ़ संवाद संस्थान द्वारा सरकारी विज्ञापन आवंटन में भी मनमानी की जा रही है।
नियमित रूप से प्रकाशित हो रही साप्ताहिक व मासिक पत्रिकाओं के संपादकों और संवाददाताओं को न तो विज्ञापन का लाभ दिया जा रहा है और न ही अधिमान्यता पत्रकार में शामिल किया जा रहा है और न ही मंत्रालय प्रवेश पास की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
इससे यह साफ प्रतीत होता है कि विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का अभाव है।वहीं, पत्रकार संगठनों की चुप्पी भी इस भेदभावपूर्ण रवैये को अप्रत्यक्ष समर्थन दे रही है।
यह चुप्पी प्रेस स्वतंत्रता और पत्रकार हितों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।सबसे चिंताजनक बात यह है कि विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारी सचिव पी. दयानंद जैसे ईमानदार और कर्मठ अधिकारी की छवि को भी धूमिल कर रहे हैं।
पत्रकारों ने मांग की है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो, ताकि पत्रकारिता की गरिमा बनी रहे और सभी को समान अवसर मिले।
प्रदेश के जागरूक पत्रकारों और संपादकों ने चेताया है कि यदि जल्द ही इस स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।