तरुण कौशिक/संपादक – सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई, जब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक चिट्ठी लिखकर देश के रिक्त उपराष्ट्रपति पद के लिए रमेश बैस को उम्मीदवार बनाए जाने की मांग कर डाली।
इस चिट्ठी ने केवल राजनीतिक गलियारों में चर्चा को हवा नहीं दी, बल्कि छत्तीसगढ़वासियों के मन में स्वाभिमान की एक नई लौ भी जलाई है।दीपक बैज की यह चिट्ठी सिर्फ राजनीतिक पहलू नहीं रखती, बल्कि यह उस पीड़ा और उपेक्षा की भावनाओं को भी अभिव्यक्त करती है, जो छत्तीसगढ़ के लोगों के मन में लंबे समय से रही है। बैज ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद से ही यहां की जनता ने लगातार भाजपा को भरपूर समर्थन दिया
— लोकसभा में 10 में से 9 सीटें भाजपा को मिलती रहीं, इसके बावजूद छत्तीसगढ़ से केंद्र में बड़े पदों पर कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
अधिकतर मामलों में केवल केंद्रीय राज्य मंत्री बनाकर संतोष कराया गया।दीपक बैज ने इस चिट्ठी में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यपाल रमेश बैस को उपराष्ट्रपति पद के लिए सर्वथा योग्य बताया।
रमेश बैस सात बार लोकसभा सांसद रहे हैं और झारखंड, त्रिपुरा, महाराष्ट्र जैसे राज्यों के राज्यपाल भी। उनके अनुभव और गरिमा को ध्यान में रखते हुए दीपक बैज ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद – उपराष्ट्रपति – की जिम्मेदारी सौंपी जाए।इस पहल को आम जनता से भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है। राजनीतिक विचारधारा से परे जाकर दीपक बैज ने छत्तीसगढ़ के आत्मसम्मान की बात की है।
गौरतलब है कि वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार तरुण कौशिक द्वारा लिखित पुस्तक “अटल छत्तीसगढ़” में भी रमेश बैस को लेकर भविष्यवाणी की गई थी कि वे भविष्य में राष्ट्रपति पद तक पहुंच सकते हैं।
यदि दीपक बैज की इस मांग को प्रधानमंत्री मोदी स्वीकारते हैं और रमेश बैस को उपराष्ट्रपति बनाया जाता है, तो यह न केवल कौशिक की भविष्यवाणी को सच सिद्ध करेगा, बल्कि दीपक बैज का राजनीतिक कद भी राष्ट्रीय स्तर पर और ऊंचा कर देगा।अब सभी की नजर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्णय पर टिकी है – क्या वे इस चिट्ठी को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ियों की भावनाओं का सम्मान करेंगे?
फिलहाल दीपक बैज की यह पहल छत्तीसगढ़ के जनमन में एक सकारात्मक संदेश छोड़ चुकी है – कि राजनीति से ऊपर उठकर भी किसी राज्य के गौरव और जनआकांक्षाओं के लिए आवाज़ उठाई जा सकती है।