छत्तीसगढ़िया ने चाहा तो प्रमोद की जीत तय…!

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बिलासपुर/ तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव की शंखनाद हो चुकी है और 11 फरवरी को मतदान होने जा रहा है। राज्य के न्यायधानी बिलासपुर शहर का महापौर पद का चुनाव इस बार हाईप्रोफाइल हो चुका है और यहां पर इस पद को लेकर छत्तीसगढ़िया और परदेशिया मुख्य मुद्दा बना हुआ से लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद नायक को अपने ही पार्टी से गुटबाजी का सामना करना पड़ रहा है ,जिसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी जान रहे हैं, जबकि भाजपा प्रत्याशी गैर छत्तीसगढ़िया एम पद्मजा उर्फ पूजा विधानी को भाजपा का एकतरफा योगदान मिल रहा है। जातिगत समीकरण की बात करें तो बिलासपुर शहर में कुर्मी समाज का बाहुल्य शहर माना जा रहा है और यहां पर गैर छत्तीसगढ़ियों से ज्यादा छत्तीसगढ़िया निवासरत हैं लेकिन कुर्मी समाज के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है क्योंकि हमेशा कुर्मी समाज अपने समारोह में कहते हैं कि कुर्मी समाज एकता की मिसाल है लेकिन समाज के वरिष्ठ नेता लोग समाज के नीचे स्तर के लोगो को आगे बढ़ने नहीं देते हैं लेकिन इस बार बिलासपुर शहर में छत्तीसगढ़ बनने के बाद पहली किसी कुर्मी को महापौर पद का प्रत्याशी घोषित किए गए हैं,जिनका श्रेय कांग्रेस पार्टी को जाने लगा है और अब कुर्मी समाज को अपनी ताकत दिखाने का अवसर मिला है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बिलासपुर शहर में लगभग 30 से 40 हजार की संख्या में कुर्मी समाज के मतदाता निवासरत हैं। जिसमें कांग्रेस और भाजपा के वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं लेकिन क्या बिलासपुर शहर के कुर्मी समाज के लोग राजनीतिक दल दल से ऊपर उठकर अपने समाज के महापौर प्रत्याशी प्रमोद नायक को एकतरफा विजय दिलाने के लिए मतदान करेंगे या फिर कुर्मी समाज अपनी पुरानी परंपरा को जीवंत रखते हुए फिरकापरस्ती में बंटकर प्रमोद नायक का साथ न दे, यह तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा लेकिन वर्तमान में कुर्मी समाज के लिए ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़िया ओबीसी वर्ग के लिए गर्व की बात होना चाहिए कि कांग्रेस पार्टी ने छत्तीसगढ़िया ओबीसी वर्ग के नेता को महापौर प्रत्याशी बनाए हैं तो बिलासपुर शहर में गैर छत्तीसगढ़िया के बजाए मूल छत्तीसगढ़िया नेता प्रमोद नायक को महापौर बनाने में अहम् भूमिका निभाने चाहिए क्योंकि दूसरे राज्यों में अपने राज्य के मूल निवासियों को साथ दिया जाता है न कि छत्तीसगढ़ प्रदेश की तरह गैर छत्तीसगढ़ियों का साथ देते हैं। बड़े ही विडंबना की बात है कि छत्तीसगढ़ राज्य को बने 25 साल हो चुके हैं लेकिन छत्तीसगढ़िया पन आज तक छत्तीसगढ़ में देखने को नहीं मिल रहा है। अब निश्चित रूप से बिलासपुर शहर की जनता को दिखाना चाहिए कि छत्तीसगढ़िया अपने छत्तीसगढ़िया भाई बहन का साथ देगा न कि गैर छत्तीसगढ़िया के साथ..! फिलहाल प्रमोद नायक की जीत पर सबकी निगाहें टिकी हुई है,अगर प्रमोद चुनाव जीते तो समझों कि यह छत्तीसगढ़िया की जीत है न कि कांग्रेस प्रत्याशी की , अब जनता को फैसला करना होगा कि उन्हें किसका साथ देना है..!


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