बिलासपुर भागवत प्रसाद/ ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी/
लंबे समय से निष्क्रिय पड़े छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में अध्यक्ष पद पर अब युवा चेहरे की नियुक्ति की तैयारी चल रही है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इस पद पर ऐसे व्यक्ति को लाने के इच्छुक हैं जो भाषा आंदोलन के साथ डिजिटल और नई पीढ़ी से भी जुड़ा हो।राज्य में छत्तीसगढ़ी को वर्षों पहले राजभाषा का दर्जा मिल चुका है, लेकिन राष्ट्रीय पहचान के लिए जरूरी प्रयासों में रफ्तार नहीं आ पाई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आयोग की सक्रियता ही इस दिशा में पहला कदम है, और युवा नेतृत्व से इसमें नई ऊर्जा आ सकती है।वहीं लंबे समय से इस आयोग के अध्यक्ष, सदस्य का पद खाली है । पूर्व में इस पद पर पद्मश्री श्यामलाल चतुर्वेदी, दानेश्वर शर्मा और विनय पाठक जैसे वरिष्ठ साहित्यकार रहे हैं, जिन्होंने भाषा के संरक्षण और प्रचार में कोई विशेष योगदान नहीं दे सके, मगर बीते साढ़े छः साल से आयोग बिना स्थायी अध्यक्ष के काम कर रहा है और न तो बैठकें नियमित हो रही हैं, न ही ठोस नीतियां बन रही हैं।वहीं भाषा हितैषियों का कहना है कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में इस उम्र दराज साहित्यकारों को नहीं बल्कि युवा अध्यक्ष से बनाया जाए। जो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर छत्तीसगढ़ी का अधिक प्रचार-प्रसार होगा। नई पीढ़ी के बीच भाषाई जुड़ाव बढ़ेगा। आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।सूत्रों के मुताबिक, सत्ता और संगठन के भीतर इस पद को लेकर नामों पर सहमति न बनने से नियुक्ति अब तक अटकी थी। लेकिन अब युवा वर्ग को प्रतिनिधित्व देने के संकेत मिल रहे हैं, जिसे आगामी राजनीतिक रणनीति से भी जोड़ा जा रहा है।भाषा प्रेमियों की मांग है कि नियुक्ति शीघ्र की जाए, ताकि आयोग पूरी क्षमता से काम शुरू करे और छत्तीसगढ़ी को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की मुहिम में ठोस प्रगति हो सके।