तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार कब होगा? 18 अगस्त को शपथग्रहण की पूरी संभावना जताई जा रही थी, लेकिन अब इस पर भी संशय गहराने लगा है। लगातार अटकते इस मंत्रिमंडल विस्तार ने न केवल प्रदेश सरकार बल्कि भाजपा संगठन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।पहले चरण में विष्णु देव साय ने रमन सरकार में मंत्री रह चुके वरिष्ठ नेता रामविचार नेताम, दयाल दास बघेल और केदार कश्यप को मंत्रिमंडल में शामिल किया। इनके साथ कुछ नए विधायकों को भी मौका मिला। लेकिन इन नए चेहरों की कार्यप्रणाली पर समय-समय पर सवाल उठते रहे और उन्हें मंत्रिपद से हटाए जाने की चर्चा भी जोरों पर रही।अब खबर यह है कि तीन नए विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। लेकिन लगातार चुनाव जीतने वाले वरिष्ठ विधायक, जो रमन सरकार में भी मंत्री रहे हैं, उन्हें दरकिनार किए जाने से नाराजगी और असंतोष बढ़ता जा रहा है।सबसे अहम पहलू यह है कि भाजपा में मंत्रिमंडल विस्तार पर अंतिम मुहर हमेशा केंद्र नेतृत्व की होती है। इसके बावजूद बार-बार विस्तार की तारीख टलने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या संगठन और सरकार में तालमेल की कमी है? क्या केंद्र और राज्य नेतृत्व के बीच सहमति नहीं बन पा रही है?राजनीतिक हलकों में चर्चा आम है कि लगातार अटकते मंत्रिमंडल विस्तार ने भाजपा की कार्यशैली पर नकारात्मक असर डाला है। इससे सरकार की साख प्रभावित हो रही है और संगठन की छवि पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या 18 अगस्त को सचमुच नए मंत्री शपथ लेंगे या यह तारीख भी महज अफवाह साबित होगी। केवल मंत्रिमंडल ही नहीं, बल्कि संसदीय सचिवों के पद अब तक खाली पड़े हैं। नए विधायकों में इससे नाराजगी है। वहीं शेष बचे निगम,मंडल,आयोग,बोर्ड और किसानों से जुड़े जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने से भी सरकार और भाजपा संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।