बिलासपुर/ तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा अध्ययन विभाग द्वारा ‘चीनी संस्कृति का परिचय’ विषय पर दो दिवशीय (10-11 फरवरी) अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का उद्धाटन सोमवार, 10 फरवरी को विवि के कुलसचिव प्रो. आनन्द पाटील की अध्यक्षता में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में गुरूकुल विद्यापीठ इब्राहिमपट्टणम के प्रधानाचार्य डॉ. प्रेम चन्द्र ने कहा कि मानवता ही विश्व की सबसे बड़ी संस्कृति है। उन्होंने कहा कि भारत और चीन की प्राचीन सभ्यताएं है। संस्कृति जीवन जिने का एक मार्ग है और संस्कृति को निरंतर जारी रखने के लिए हमें इतिहास और साहित्य बढ़ना चाहिए। अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. आनन्द पाटील ने कहा कि द्वंद्वात्मक स्थिति से निपटने के लिए हमें संस्कृति का सहारा लेना पडता है। मनुष्य ही संस्कृति का पालनहार होता है। आज की परिस्थिती में हमें आत्मावलोकन व आत्मविवेचन करने की आवश्यकता है। स्वागत वक्तव्य भाषा विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. एच.ए. हुनगुंद ने दिया।कार्यक्रम का प्रास्ताविक वक्तव्य अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा अध्ययन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अनिर्बाण घोष ने दिया। संचालन सहायक प्रोफेसर डॉ. संदीप कुमार ने किया तथा सहायक प्रोफेसर सन्मति जैन ने आभार माना। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्ज्वलन तथा कुलगीत से किया गया।इस अवसर पर डॉ. अनिल कुमार पाण्डेय, डॉ. रवि कुमार, डॉ. मैत्रेयी, डॉ. हिमांशु शेखर, आम्रपाल शेंदरे, डॉ. सरिता भारद्वाज, बी. एस. मिरगे सहित अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।