तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंत्री मंडल विस्तार की तारीख और समय तो तय हो गई है, लेकिन अब भी इस पर सस्पेंस है कि क्या आज ही संसदीय सचिवों और निगम–मंडल–आयोग/बोर्डों में नियुक्तियों का आदेश जारी होगा या फिर विधायकों व पार्टी कार्यकर्ताओं को और इंतज़ार करना पड़ेगा।भाजपा विधायक दल के संयोजक सुशांत शुक्ला ने सभी विधायकों को सुबह 10.30 बजे राजभवन में उपस्थित रहने की सूचना जारी कर दी है। यानी नए मंत्री तो आज सामने आ ही जाएंगे। लेकिन सवाल यह है कि जिन संसदीय सचिवों और निगम–मंडल–आयोग/बोर्ड के पदों को लेकर महीनों से रस्साकशी चल रही है, उन पर सरकार कब फैसला लेगी? विधायकों और दावेदारों में बेचैनी है। कई नेता खुले तौर पर मानते हैं कि संगठन और सरकार केवल मंत्रिमंडल तक ही सीमित रहकर संतुलन नहीं बना सकती। संसदीय सचिवों की नियुक्ति और निगम–मंडल–आयोग के बंटवारे से ही क्षेत्रीय और जातीय संतुलन के साथ–साथ कार्यकर्ताओं का विश्वास भी मजबूत होगा।पार्टी के भीतर भी सवाल उठ रहे हैं कि “आख़िर कब तक सिर्फ़ मंत्रियों के भरोसे सरकार चलती रहेगी?” क्योंकि संसदीय सचिव और बोर्ड–आयोग ही जमीनी स्तर पर जनता और संगठन के बीच पुल का काम करते हैं।छत्तीसगढ़ के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि यदि सरकार आज ही मंत्रियों के साथ संसदीय सचिव और बोर्ड–आयोग की घोषणा कर देती है तो कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ेगा और भाजपा का मैसेज साफ़ जाएगा कि वह सत्ता–संगठन दोनों स्तर पर संतुलन साधने में पीछे नहीं है। वहीं अगर इन नियुक्तियों को फिर टाल दिया गया तो असंतोष और तेज़ हो सकता है। वहीं कैबिनेट विस्तार के साथ ही आज सभी की निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि मुख्यमंत्री और भाजपा नेतृत्व नींद से जागकर संसदीय सचिवों व बोर्ड–आयोग की नियुक्तियों का रास्ता साफ़ करते हैं या फिर यह एक और अधूरा इंतज़ार बनकर रह जाएगा।