महिला थाना प्रभारी लक्ष्मी चौहान, संवेदनशीलता और सख़्ती का संतुलन।

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तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

बिलासपुर पुलिस की पहचान बनी महिला थाना प्रभारी टीआई लक्ष्मी चौहान ने अपनी कार्यशैली से यह साबित किया है कि पुलिसिंग केवल अपराधियों पर शिकंजा कसने तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ितों को न्याय और सुरक्षा का भरोसा दिलाना भी उतना ही ज़रूरी है।लक्ष्मी चौहान के कार्यकाल में महिला थाना महज़ एक औपचारिक थाने की छवि से आगे बढ़कर महिलाओं के लिए आश्रय, न्याय और विश्वास का केन्द्र बना है। उन्होंने ऐसे कई मामलों को त्वरित संज्ञान में लेकर न केवल पीड़ित महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि समाज में यह संदेश भी दिया कि महिला थाने का दरवाज़ा किसी के लिए भी बंद नहीं है।महिला थाना प्रभारी लक्ष्मी चौहान द्वारा थाने में आने वाली महिलाओं को केवल कागज़ी प्रक्रिया से नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से सुना जाता है। यही कारण है कि महिलाएं बिना झिझक अपने मुद्दे रख पाती हैं।वहीं दहेज प्रथा, महिला उत्पीड़न और घरेलू हिंसा जैसे मामलों में टीआई लक्ष्मी चौहान ने कठोरता से कार्रवाई की है। उनकी छवि सख़्त लेकिन न्यायप्रिय अधिकारी की बनी है। कई मामलों में जहां परिवार टूटने की कगार पर था, वहां उन्होंने परामर्श और मध्यस्थता से रिश्तों को बचाने का प्रयास किया। वहीं शहर के सामाजिक संगठनों और महिला समूहों में उनका नाम विश्वास के साथ लिया जाता है।वहीं महिला उत्पीड़न के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई बार राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बीच निष्पक्ष कार्रवाई करना कठिन हो जाता है। थाने की सीमित संसाधनों और स्टाफ के बावजूद न्याय की गति बनाए रखना एक बड़ी परीक्षा है।टीआई लक्ष्मी चौहान की कार्यशैली बताती है कि यदि पुलिस अधिकारी में संवेदनशीलता और सख़्ती का सही संतुलन हो, तो कानून का डर और जनता का भरोसा दोनों कायम रह सकते हैं। बिलासपुर का महिला थाना आज इसी दृष्टिकोण से आगे बढ़ रहा है।


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