तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर जिले में इन दिनों मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए जारी फर्जी ईओडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। जहां बिलासपुर तहसील कार्यालय के रीडर और तहसीलदारों की भूमिका संदेह के घेरे में है, वहीं बिलासपुर नगर निगम सीमा से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित च्वाइस सेंटर ने भ्रष्टाचार की गाथा लिख दी है।विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि इन च्वाइस सेंटरों में तहसील कार्यालय की फर्जी सील और मुहर तक रखी जाती हैं, जिनके सहारे न केवल जाति,निवास , आय, ईओडब्ल्यूएस बल्कि अन्य कई तरह के फर्जी प्रमाण पत्र भी धड़ल्ले से जारी होते रहे हैं।यह खुलासा भी कम चौंकाने वाला नहीं है कि सामाजिक कार्यकर्ता पहले ही कई बार साक्ष्यों के साथ बिलासपुर जिले के तहसीलदारों को इस धंधे की जानकारी दे चुके थे। बावजूद इसके, तहसीलदारों ने न तो जांच बैठाई और न ही कार्रवाई की। आज जबकि मेडिकल सीट जैसे संवेदनशील मामले में फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है, तहसीलदारों की ‘मौन भूमिका’ खुद ही बहुत कुछ कह रही है।इस पूरे घटनाक्रम से प्रशासन की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता अब सीधे कलेक्टर संजय अग्रवाल से मांग कर रहे हैं कि इस मामले में तत्काल जांच और कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में मेडिकल शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र को भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की भेंट चढ़ने से बचाया जा सके।