संपादक की कलम से… साहेब, सरकार चलत हवय के बियाह-बरात के मंडप..?

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ के राजनीति मं आजकल नियुक्ति के लफड़ा चलत हवय। पौने दुई बरस के सरकार होगे, फेर निगम-मंडल-आयोग ले लेकर जिला सहकारी बैंक तक सब्बो नियुक्ति अब तक अधर मं लटके हवय।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विदेश यात्रा ले घलो लहुट आएं, तब भाजपई मन अऊ जनता मन ला भरोसा रहिस के अब तो आदेश के बौछार होही। फेर का होइस? पितर पखवाड़ा सुरू होगे अऊ नियुक्ति मं ताला लग गे। अब नजर गड़े हवय नवरात के नौ दिन मं, अउ अगर त बखत घलो कलम नइ चले त दीपावली मं पटाखा संग नियुक्ति के आस राखे जावत हवय।सबले मजेदार बात ये हवय के भाजपा के अपन नेता मन ह सरकार के ये ढीलापन ले बिचलित होवत हवंय। नवा विधायक मन संसदीय सचिव बनइया के सपना देख-देख के अघा गइन। किसान के हित मं चलइया संस्थान मन ह मुखिया बिहीन जइसे-तइसे चलत हवय।अब सवाल उठत हवय सरकार अऊ संगठन नियुक्ति ला धार्मिक पंचांग ले चलाही? राजनीति मं कहिथें समय सबले बड़े धन होथे। फेर इहां समय जावत हवय अऊ सरकार “शुभ मुहूर्त” खोजत हवय।अगर ये ढंग चलत रहिस त जनता ह ये कहे मं देर नइ करही के साहेब, सरकार चलत हवय के बियाह-बरात के मंडप?


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