संपादक की कलम से…*कांग्रेस पार्टी मं गुंजत हे ‘वोट चोर, गद्दी छोड़।

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ म आजकल राजनीतिक गलियारा म एक नवा नारा गूँजत हे “वोट चोर गड्डी छोड़”। ये नारा कांग्रेस पार्टी के भीतर अपन नेता मन के खिलाफ उठे असंतोष के प्रतिक बनके सामने आथे।कांग्रेस कार्यकर्ता अउ समर्थक मन कहिथें कि जनता के विश्वास ले मिले वोट के बाद, जब नेत्रत्व घेरल जात हे या गलत फैसले ले जनता के भरोसा टुटत हे, त ओखर जवाबदारी बनथे कि कुर्सी ले हट जावय। “वोट चोर गड्डी छोड़” ह दरअसल कांग्रेस के भीतर के बगावत अउ जनता के मनमिजाज के इशारा करथे।राजनीतिक करईया मन कहिथें कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस म संगठन अउ नेतृत्व के बीच तालमेल बिगड़त जावत हे। कई कार्यकर्ता मन खुलकर सवाल उठावत हें के जब जनता हमन ल जिताइस, त फेर जनता के भरोसा त तोड़ दे गीस, त काबर गड्डी म बने रहिबे?ये नारा ह एक तरह ले कांग्रेस पार्टी म लोकतांत्रिक असंतोष के आवाज हे। अगर पार्टी नेतृत्व ह समय रहते ये असंतोष ल शांत नइ कर सकिस, त आगामी चुनाव म ये नारा ह पार्टी बर भारी सिरदर्द बन सकथे।“वोट चोर गड्डी छोड़” नारा ह कांग्रेस बर एक चेतावनी हे। पार्टी ल अब अपन भीतर झांकना परही, नइ त जनता अउ कार्यकर्ता दुनों के बीच दूरी अउ अविश्वास अउ गहिरावत जाही।


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