विकास नंद /सर्वव्यापी/

यूरिया खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाने की मांग को लेकर आज सारंगढ़ जिला मुख्यालय के भारत माता चौक में भीम आर्मी भारत एकता मिशन छत्तीसगढ़ जिला इकाई सारंगढ़–बिलाईगढ़ ने उग्र आंदोलन किया।
इस दौरान कार्यकर्ताओं और किसानों ने केंद्र एवं राज्य सरकार सहित कृषि व खाद्य मंत्रियों का पुतला दहन कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि शासन–प्रशासन द्वारा किसानों को उचित दर पर खाद उपलब्ध कराने में विफलता बरती जा रही है।
इससे पूर्व भीम आर्मी ने कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन कोई ठोस कदम न उठाए जाने से किसानों और युवाओं में आक्रोश फैल गया।
आंदोलन में शामिल भीम आर्मी छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष दिनेश आजाद ने कहा –“हम किसान परिवार से आते हैं, अगर किसानों के लिए विधानसभा तक घेराव करना पड़े तो भी पीछे नहीं हटेंगे।”वहीं, प्रदेश महासचिव व अतिरिक्त बिलासपुर संभाग प्रभारी मनीन्दर सिंह आजाद ने सरकार पर व्यापारी वर्ग से सांठगांठ का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों का पेट काटा जा रहा है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रदेश सचिव कालेश्वर खूंटे ने सवाल उठाया कि जब सरकार पूरे प्रदेश में शराब आपूर्ति कर सकती है, तो किसानों के लिए यूरिया खाद उपलब्ध कराने में लापरवाही क्यों?
जिला अध्यक्ष आपुर बंजारे ने सरसीवा में हाल ही में 600 बोरी यूरिया खाद जब्त होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट करता है कि सरकारी सोसाइटियों को दरकिनार कर व्यापारियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।
आंदोलन में शामिल नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि किसानों को 266 रुपए प्रति बोरी की दर से सरकारी मूल्य पर खाद उपलब्ध नहीं कराया गया, तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा।इस किसान आंदोलन में भीम आर्मी की विभिन्न इकाइयों के पदाधिकारी व बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
जिनमें जिला उपाध्यक्ष खगेश निराला, आईटी सेल प्रभारी राजेश भास्कर, जिला महासचिव मनोज जांगड़े, कार्यकारिणी सदस्य राज वारे, अमित कुर्रे, जनक लहरे, शुशील अनंत, निर्मल कुमार निराला (ब्लॉक अध्यक्ष सारंगढ़), लोकेश प्रेमी (ब्लॉक अध्यक्ष बिलाईगढ़), अमन कुमार अंबेडकर (पूर्व जिला महासचिव) सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।आंदोलन के दौरान किसानों और युवाओं का गुस्सा साफ झलक रहा था।
भीम आर्मी ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने तत्काल कदम नहीं उठाए, तो यह लड़ाई प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप ले सकती है।