हिन्दी दिवस पर कवि सम्मेलन : भाषा की अस्मिता पर जन्मजय नायक ने किया प्रखर विमर्श।

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विकास नंद/ सर्वव्यापी/

सरायपाली/बसना – हिन्दी दिवस के अवसर पर पूर्वा साहित्य मंच के तत्वावधान में प्रतिभा पब्लिक स्कूल बालसी में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन वरिष्ठ साहित्यकार अमृत पटेल ने किया तथा अध्यक्षता छत्तीसगढ़ शब्द के संपादक अवधेश अग्रवाल ने की।

इस अवसर पर वंदेमातरम् सेवा संस्थान के उपाध्यक्ष, साहित्यकार एवं आकाशवाणी कलाकार जन्मजय नायक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ। तत्पश्चात् अंचल के अनेक साहित्यकारों ने अपनी काव्य प्रस्तुति दी।

अपने साहित्यिक संबोधन में जन्मजय नायक ने हिन्दी की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा –”आज कौरवों के दरबार में दुशासन हमारी अस्मिता की द्रौपदी का चीर-हरण करता चला आ रहा है… हमारा भीम, अर्जुन ही नहीं श्रीकृष्ण भी निरूपाय हो गए हैं। यदि हम आज भी द्रौपदी की करूण पुकार नहीं सुन पाए तो हमारे पौरुष को धिक्कार है।”

उन्होंने कहा कि जिस भाषा ने पूरे राष्ट्र को एकता के सूत्र में बाँधा था, वही आज उपेक्षित हो गई है। मातृभाषा के स्थान पर अंग्रेजी थोपने की प्रवृत्ति ने हमारी संस्कृति और सभ्यता को कमजोर किया है। हिन्दी फिल्मों और खेलों से ख्याति पाने वाले लोग भी अंग्रेजी बोलने में गर्व अनुभव करते हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

नायक ने कहा कि राजनीति ने हिन्दी को केवल वोट की भाषा बनाकर छोड़ दिया है। जबकि हिन्दी जैसी समृद्ध भाषा को विदेशी शब्दों की भीख माँगने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने चेताया – “हिन्दी को सबसे बड़ा खतरा हिन्दी वालों से ही है क्योंकि घर-घर में अंग्रेजी घुस चुकी है।”

कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों ने हिन्दी की महत्ता और भाषा संरक्षण पर अपने विचार रखते हुए हिन्दी दिवस को सार्थक बनाया।


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