तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ की राजनीति में शनिवार का दिन बेहद चौंकाने वाला और असहज करने वाला रहा। राज्य के पूर्व गृहमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता ननकी राम कंवर को रायपुर पुलिस ने टाटीबंध इलाके में नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर लिया है। जानकारी के अनुसार, ननकी राम कंवर आज रायपुर में कोरबा कलेक्टर के खिलाफ धरना प्रदर्शन करने वाले थे, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने उन्हें रायपुर पहुंचने पर रोक दिया और सुरक्षा दस्ते ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया।बताया जा रहा है कि ननकी राम कंवर कोरबा जिले के कलेक्टर को तत्काल हटाने और उनके कार्यों की वैधानिक जांच की मांग को लेकर धरना देने वाले थे। लेकिन पुलिस प्रशासन ने उनके आंदोलन को “कानून-व्यवस्था के लिए खतरा” बताते हुए पूर्व गृहमंत्री को घर में कैद कर दिया।उधर, टाटीबंध क्षेत्र, जहाँ उन्हें रखा गया है, वहाँ सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से कड़ा कर दिया गया है। पुलिस के जवान पूरे इलाके में तैनात हैं और मीडिया कर्मियों को भी उस क्षेत्र में जाने से रोका जा रहा है। इसके बावजूद कई पत्रकार मौके पर पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं।राजनीतिक गलियारों में इस घटना की जोरदार चर्चा है कि एक तरफ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, जो खुद एक आदिवासी नेता हैं, वहीं दूसरी ओर ननकी राम कंवर, जो भाजपा सरकार में आदिवासी चेहरे के रूप में गृहमंत्री रह चुके हैं। अब जब एक आदिवासी मुख्यमंत्री की सरकार में ही एक आदिवासी पूर्व गृहमंत्री को धरने से पहले गिरफ्तार किया गया, तो इसे लेकर राज्य की राजनीति में “अंदरखाने की टकराहट” की चर्चाएँ तेज हो गई हैं।राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह स्थिति सरकार के लिए बेहद असहज है। क्योंकि अपने ही दल के वरिष्ठ और पूर्व गृह मंत्री को आंदोलन से पहले गिरफ्तार कर लेना, वह भी जनता के मुद्दों पर, एक राजनीतिक विडंबना से कम नहीं। सोशल मीडिया पर भी लोग तीखे सवाल पूछ रहे हैं कि क्या अब लोकतंत्र में मांग उठाने पर भी हाउस अरेस्ट मिलेगा? आदिवासी सरकार में आदिवासी नेताओं की ही आवाज़ बंद की जा रही है? यह मामला न केवल राज्य सरकार की असहिष्णुता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सत्ता और संगठन के बीच खींचतान कितनी गहराई तक पहुँच चुकी है।राज्य की राजनीति में यह घटना संभवतः पहली बार हुई है जब किसी सत्ता पक्ष के पूर्व गृहमंत्री को अपने ही दल की सरकार के ख़िलाफ़ धरना देने से पहले नजरबंद कर लिया गया , यह अपने आप में छत्तीसगढ़ की राजनीति का दुर्लभ और व्यंग्यात्मक अध्याय है।


