कलेक्टर अजीत वसंत प्रकरण: भाजपा सरकार के लिए ‘हया’ का सवाल बनता जा रहा है..! - Sarvavyapi कलेक्टर अजीत वसंत प्रकरण: भाजपा सरकार के लिए ‘हया’ का सवाल बनता जा रहा है..! - Sarvavyapi

कलेक्टर अजीत वसंत प्रकरण: भाजपा सरकार के लिए ‘हया’ का सवाल बनता जा रहा है..!

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

भाजपा सरकार के अपने ही पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर द्वारा कलेक्टर अजीत वसंत पर लगातार लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोप अब राज्य सरकार के लिए एक गहरी राजनीतिक असहजता का कारण बन गए हैं। दो दिनों से चले आ रहे घटनाक्रम में, जब भाजपा के वरिष्ठ नेता ननकी राम कंवर ने कलेक्टर को हटाने और गड़बड़ियों की जांच की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू किया, तब प्रशासन ने उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया।लेकिन, सवाल यह है कि इतने गंभीर आरोपों और पार्टी के वरिष्ठ नेता के आंदोलन के बावजूद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अब तक कलेक्टर अजीत वसंत को पद से हटाने का निर्णय क्यों नहीं ले पाए?इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा सरकार के भीतर बढ़ती खींचतान को उजागर कर दिया है। एक ओर पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर जैसे अनुभवी और संगठननिष्ठ नेता भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर मुखर हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार की चुप्पी से यह संकेत मिल रहा है कि नौकरशाही पर राजनीतिक नियंत्रण कमजोर पड़ा है।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, सेवानिवृत्त मुख्य सचिव अमिताभ जैन और वर्तमान मुख्य सचिव विकास शील तीनों के स्तर पर किसी ठोस कार्रवाई का अभाव यह दर्शाता है कि प्रशासनिक तंत्र के ऊपर राजनीतिक नेतृत्व की पकड़ ढीली है।कोरबा जिले में कलेक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार की चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं। ननकी राम कंवर द्वारा बार-बार सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे को उठाना और फिर भी सरकार द्वारा कोई निर्णायक कदम न उठाया जाना जनता के बीच यह संदेश दे रहा है कि भ्रष्टाचार पर भाजपा सरकार भी उतनी ही मौन है, जितनी कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया करती थी।यह स्थिति सीधे-सीधे सरकार की साख पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है।राजनीतिक रूप से देखें तो भाजपा के वरिष्ठ नेता का विरोध किसी विपक्षी दल से भी अधिक नुकसानदेह साबित हो सकता है, क्योंकि जब अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ चेहरे सार्वजनिक रूप से सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाएं, तो विपक्ष को कुछ कहने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती।यह मामला अब केवल “एक कलेक्टर के ट्रांसफर” तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शासन की नीयत और नौकरशाही पर नियंत्रण की परीक्षा बन गया है।दो दिनों की चुप्पी और कार्रवाई न करने से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार न केवल असमंजस में दिख रही है, बल्कि यह संदेश भी जा रहा है कि नौकरशाही के सामने राजनीतिक नेतृत्व कमजोर पड़ रहा है।

यदि भाजपा सरकार ने शीघ्र ही इस मामले पर स्पष्ट रुख नहीं लिया, तो यह प्रकरण आने वाले दिनों में विपक्ष के लिए बड़ा राजनीतिक हथियार और जनता के बीच अविश्वास का प्रतीक बन सकता है।


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