संपादक के कलम से...महतारी के झांकी बन गीस, पर अस्मिता खो गीस। - Sarvavyapi संपादक के कलम से...महतारी के झांकी बन गीस, पर अस्मिता खो गीस। - Sarvavyapi

संपादक के कलम से…महतारी के झांकी बन गीस, पर अस्मिता खो गीस।

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तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ महतारी , ये सिरिफ एक देवी नई, ये हमर अस्मिता के चिन्ह ह, हमर माटी के गंध ह, हमर संस्कृति के सुघ्घर परछाईं ह। जऊन धरती म हमन जनम ले हन, ओ धरती महतारी ह। जऊन ल हमन रोज अपन बोली, अपन गीत, अपन परंपरा म पूजथन. फेर अफसोस, अब महतारी ल हमन पूजा के झांकी म, पोस्टर म, अऊ सरकारी कार्यक्रम म टांग के रख दे हन, बाकी अपन मन म नई रखन।हमन भाग्यशाली आन, जऊन भारत माता के गोद के संग-संग छत्तीसगढ़ महतारी के गोद म जनम ले हन. येच धरती ह जिहां के नदी-नाला, खेत-खलिहान, बगर-बारी, हरियाली अऊ माटी के सुगंध अपन पहचान ह. जिहां के पवन म गीता नई, गोंडवाना के गीत गूंजथे. फेर अब वो गीत मोबाइल के रिंगटोन बन गीस, अऊ वो माटी के खुशबू परफ्यूम म दबा दी गीस।बिलासपुर जिला ल लेवव , जऊन बिलासा दाई के नाम ले जाने जाथे. वो दाई जऊन अपन साहस अऊ पराक्रम ले इतिहास बदल दीस। फेर आज ओकर नाम म बने स्मारक म भीड़ नई दिखत, बस सेल्फी लेय वाला मनखे दिखथे. बिलासा दाई के त्याग ल जानय वाला मनखे कम हावय, अऊ फोटो अपलोड करे वाला मनखे जियादा।छत्तीसगढ़ पहिली राज आय जऊन अपन देवी स्वरूप “महतारी” के नांव ले पहिचान बनाय हावय। येच देश म एकलौता राज्य आय जऊन अपन धरती, अपन संस्कृति अऊ अपन नारी शक्ति ल “महतारी” कहिके सम्मान करथे. फेर जऊन राज्य म महतारी ल पूजथन, ओही राज्य म बेटी मन ल सुरक्षेला मोहताज होना पड़त हे। पोस्टर म महतारी मुस्कात हे, फेर गली-गांव म महतारी दुखी हावय।आज के समय म हमर छत्तीसगढ़ महतारी ल सिरिफ मंच म पूजथन, भाषण म बखानथन, अऊ फेसबुक म फोटो लगाथन। पर जऊन माटी महतारी कहिथे, ओकर सेवा करे वाला मनखे गिनती म रह गीस. गांव के तालाब सूख गीस, किसान के आंख लोर गीस, अऊ जंगल म जानवर भी अपन ठांव ल खोजत फिरथें, येच ह आधुनिक भक्ति के हाल।छत्तीसगढ़ महतारी के सच्चा सम्मान तब होही, जब हमर किसान खुश रहिही, हमर बेटी सुरक्षित रहिही, हमर बोली-संस्कृति जिंदा रहिही. जब हमन अपन असली पहचान ,मेहनत, सादगी अऊ मानवीयता ल अपनाबो, ओ दिन महतारी के आंख म खुशी के लोर दिखही। मय आखिरी म ईही गोठ बात कहि हव के -छत्तीसगढ़ महतारी अपन दुलार देत हावे, फेर अपन संतान मन ल चेतावत घलो हावे “पोस्टर नई, परंपरा बनव; नारा नई, व्यवहार बनव;काबर महतारी ल पूजा ले जियादा, सम्मान के भूख हे!”


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