विकास नंद/ सर्वव्यापी/
महासमुंद जिले में अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के विरुद्ध कलेक्टर विनय लंगेह की सख्त कार्रवाई ने बड़ा असर दिखाया है। प्रशासन द्वारा जप्त किए गए अवैध रेत की पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के तहत 10 रेत भंडारण स्थलों से शासन को कुल 7 करोड़ 41 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। यह कदम जिले में खनिज माफिया पर प्रभावी नियंत्रण और शासन की सख्ती का संकेत है।
कलेक्टर के निर्देश पर खनिज और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने बरबसपुर, घोड़ारी, बड़गांव और बिरकोनी क्षेत्रों में सरकारी और निजी भूमि पर अवैध रूप से संग्रहित रेत जब्त की थी। बाद में एरियल ड्रोन सर्वेक्षण द्वारा रेत की सटीक मात्रा – कुल 2,61,323 घनमीटर – का निर्धारण किया गया।जप्त रेत के संबंध में 4 जुलाई 2025 को दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई थी, लेकिन प्रस्तुत दावों में उल्लिखित मात्रा ड्रोन सर्वे से कम पाई गई, जिससे शासन को संभावित राजस्व हानि की स्थिति उत्पन्न हुई। फलस्वरूप सभी दावे निरस्त कर दिए गए।इसके बाद कलेक्टर की निगरानी में रेत को 10 अलग-अलग ब्लॉकों में विभाजित कर पारदर्शी निविदा प्रक्रिया से नीलामी की गई। बरबसपुर, घोड़ारी, बड़गांव और बिरकोनी के विभिन्न ब्लॉकों से शासन को नीलामी और शुल्कों सहित कुल 7,41,05,706 रुपए प्राप्त हुए।
कलेक्टर लंगेह ने स्पष्ट किया कि अवैध खनन, परिवहन या भंडारण में संलिप्त किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी और दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।इस निर्णायक कार्रवाई से शासन को जहां करोड़ों का राजस्व मिला है, वहीं खनन व्यवस्था में पारदर्शिता और सख्ती भी सामने आई है। जिला प्रशासन ने यह संदेश दिया है कि खनिज संपदा का दोहन अब केवल वैधानिक और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत ही संभव होगा।


