तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
बिलासपुर संभाग में इस बार की दीपावली महज रौशनी और मिठाइयों की नहीं, बल्कि ‘विशेष लिफाफों’ की चर्चाओं से भी जगमगाई। क्षेत्र के कई नेताओं की ओर से चुनिंदा पत्रकारों को इस पर्व पर जो उपहार भेजे गए हैं, वे अब चर्चा का विषय बन गए हैं।सूत्रों के अनुसार, इन ‘दीपावली लिफाफों’ में मिठाई से ज्यादा कुछ और था, कैश या महंगे तोहफों की आशंका ने पूरे मीडिया और राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। सवाल ये उठ रहा है कि क्या ये लिफाफे केवल ‘त्योहारी शुभकामनाएं’ हैं, या फिर चुनावी मौसम में ‘नरम कवरेज’ के संकेत?कुछ पत्रकारों ने इसे पारंपरिक ‘त्योहार गिफ्ट’ बताया है, वहीं कईयों ने इससे जुड़ी नैतिकता और पत्रकारिता की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।अब देखना ये है कि क्या ये मामला केवल फुसफुसाहटों तक सीमित रहेगा या कोई जांच की रौशनी में यह मामला और उजागर होगा। क्या यह दीपावली ‘चुप्पी की मिठास’ लेकर आई है या सवालों की रौशनी?वहीं इस बार दीवाली में न पटाखों की सबसे ज़्यादा मांग हो रही, न ही मिठाइयों की । सबसे ज़्यादा डिमांड रही “सरकारी लिफाफों” और “नेताओं की कृपा दृष्टि” की।सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के कई हिस्सों में विधायक और मंत्रीगण अपने-अपने क्षेत्र में ‘लिफाफा वितरण समारोह’ का आयोजन कर रहे हैं, जिसमें वरिष्ठ पत्रकारों को “विशेष प्रेम” स्वरूप मिठाई के डब्बों के साथ एक अद्भुत वजनदार लिफाफा भी भेंट किया जा रहा है।सूत्र बताते हैं कि इधर अफसरों की भी बल्ले-बल्ले हो गई है। कई जिलों में कलेक्टर, एसपी और विभागीय प्रमुखों को महंगी मिठाइयों, ड्रायफ्रूट्स और गिफ्ट हैम्परों के साथ ‘कृपा लिफाफा’ प्राप्त हुआ है। एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, दीवाली में लक्ष्मी के दर्शन तो होते हैं, पर इस बार तो लक्ष्मी जी खुद चलकर आईं ,वो भी कनिष्ठ अधिकारियों के हाथों!जब इस संबंध में एक मंत्री से पूछा गया कि आम जनता को क्या दिया गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, जनता को हमने शुभकामनाएं दी हैं और वादों का डिब्बा दिया है, वो भी बिना एक्सपायरी डेट के!विशेष टिप्पणी-इस दीवाली, देश में रोशनी से ज़्यादा ‘प्रकाश डाला गया’ है उस अंधेरे पर, जहाँ लोकतंत्र के स्तंभ अपने-अपने हिस्से की मिठाई चखते दिखे। बाकी जनता? वो तो बस मिठाई की दुकान के बाहर सेल्फी ले रही है।


