के.एस.ठाकुर/ कार्यकारी संपादक/ सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में इस बार किसे मिलेगी कमान, इसे लेकर सत्ता और संगठन के गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। एक वरिष्ठ अफसर ने खुलासा किया है कि राजभाषा आयोग का अध्यक्ष पद पूरी तरह राजनीतिक नियुक्ति है। कांग्रेस सरकार को छोड़ दें तो पूर्ववर्ती रमन सरकार के समय तक इस पद पर हमेशा वरिष्ठ साहित्यकारों , खासकर एक जाति को ही तवज्जो दी गई थी।मगर इस बार समीकरण कुछ अलग दिखाई दे रहे हैं। आयोग के नियमों के अनुसार अध्यक्ष पद के लिए छत्तीसगढ़ी भाषा के जानकार साहित्यकार, पत्रकार या भाषाविद को प्राथमिकता देने का प्रावधान है। परंतु अब भाजपा सरकार में यह चर्चा तेज है कि उम्रदराज साहित्यकारों और पारंपरिक पत्रकारों के बजाए भाजपा संगठन से जुड़े जमीनी कार्यकर्ताओं में से किसी को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के एक पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता जिन्हें डाॅक्टर साहब के नाम से जाने जाते हैं उनके करीबी समर्थक, भाजपा के युवा नेता सह पत्रकार का नाम इस पद के लिए सबसे आगे चल रहा है। बताया जा रहा है कि उन्होंने लंबे समय से छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं, जिसके चलते उन्हें संगठन स्तर पर मजबूत समर्थन प्राप्त है।अफसरों का कहना है कि यह राजनीतिक नियुक्ति है, इसलिए अंतिम फैसला भाजपा संगठन महामंत्री पवन साय और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सहमति से ही होगा।अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भाजपा नेतृत्व इस बार किसी युवा पत्रकार-नेता पर भरोसा जताते हुए राजभाषा आयोग की बागडोर सौंपेगा, या परंपरा के अनुसार फिर किसी वरिष्ठ साहित्यकार को यह जिम्मेदारी दी जाएगी।



