विकास नंद/ सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने पर जहां पूरा प्रदेश रजत जयंती मना रहा है, वहीं प्रदेश के पूर्वी छोर पर स्थित सरायपाली कस्बा आज भी विकास की राह में अनेक प्रश्नों से जूझ रहा है।
ओडिशा सीमा से सटा यह शांत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर कस्बा, कृषि, पर्यटन और व्यापार के क्षेत्र में अपार संभावनाओं से परिपूर्ण है, किंतु बुनियादी ढांचे की कमी आज भी इसकी प्रगति की राह में बाधक बनी हुई है।
सरायपाली की पहचान एक कृषि प्रधान क्षेत्र के रूप में रही है।
यहां की जलवायु खेती के लिए अनुकूल है और आसपास के ग्रामीण इलाकों में धान, तिलहन एवं दलहन की भरपूर उपज होती है। साथ ही धार्मिक दृष्टि से भी यह क्षेत्र समृद्ध है
देवी मंदिर, झरने, जंगल और ऐतिहासिक स्थल यहां के पर्यटन विकास के लिए आधार बन सकते हैं।
भौगोलिक दृष्टि से सरायपाली का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यहां चारों दिशाओं में राष्ट्रीय राजमार्ग की सुविधा उपलब्ध है, जिससे यह नगर प्रदेश और ओडिशा दोनों राज्यों के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क केंद्र बन चुका है।
राजनीतिक रूप से भी सरायपाली सदैव सक्रिय रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के शासनकाल में यहां के नेताओं का दबदबा रहा है, जिसने इसे क्षेत्रीय राजनीति में एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया है।
फिर भी, छत्तीसगढ़ के 25 वर्षों के विकास यात्रा में सरायपाली कुछ मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित रह गया है। शिक्षा और स्वास्थ्य की व्यवस्था आज भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है।
कई शासकीय विद्यालयों की इमारतें जर्जर हालत में हैं, वहीं अस्पतालों में डॉक्टर और संसाधनों की कमी बनी हुई है। कोर्ट, तहसील और अन्य शासकीय दफ्तरों में भी पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं, जिससे आमजन को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरायपाली के विकास के लिए एक “मास्टर प्लान” तैयार किया जाए तो यह नगर न केवल महासमुंद जिले बल्कि पूरे प्रदेश का एक आदर्श विकास मॉडल बन सकता है। सही योजना, संसाधनों का उपयोग और राजनीतिक इच्छाशक्ति से सरायपाली को कृषि, पर्यटन और व्यापार के क्षेत्र में नई पहचान मिल सकती है।रजत जयंती वर्ष में जब पूरा छत्तीसगढ़ विकास की उपलब्धियां गिना रहा है, तब सरायपाली की जनता का यह सवाल शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए एक यक्ष प्रश्न बन गया है।


