राजनांदगांव की कमान अब लेडी सिंघम अंकिता के हाथों। - Sarvavyapi राजनांदगांव की कमान अब लेडी सिंघम अंकिता के हाथों। - Sarvavyapi

राजनांदगांव की कमान अब लेडी सिंघम अंकिता के हाथों।

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तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ की पहली महिला आईपीएस अधिकारी अंकिता शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सख्त अनुशासन, ईमानदारी और निडर कार्यशैली के लिए जानी जाने वाली अंकिता शर्मा का तबादला सक्ती जिले से राजनांदगांव कर दिया गया है। यह तबादला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक बड़े ‘विश्वास और इनाम’ का प्रतीक माना जा रहा है।राजनांदगांव जिला न केवल भौगोलिक रूप से बड़ा है, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।

यह क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का गृह विधानसभा क्षेत्र है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने इस महत्वपूर्ण जिले की जिम्मेदारी अंकिता शर्मा जैसी कर्मठ और सख्त पुलिस अधिकारी को सौंपकर यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार मेहनती, ईमानदार और परिणाम देने वाले अधिकारियों पर भरोसा करती है।सक्ति, जहां अब तक अंकिता शर्मा पुलिस अधीक्षक के रूप में पदस्थ थीं, छत्तीसगढ़ का एक छोटा और नवगठित जिला है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने वहां पुलिसिंग की नई पहचान बनाई।अपराध नियंत्रण, नशा मुक्ति, महिला सुरक्षा और सामाजिक अभियानों में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया।जनता के बीच उनकी पहचान “महिला सिंघम” के रूप में स्थापित हुई।उनकी इस कार्यशैली को देखते हुए राज्य सरकार ने उन्हें राजनांदगांव जैसे बड़े और संवेदनशील जिले की कमान सौंपकर उनके काम पर विश्वास जताया है। यह बदलाव सामान्य प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि एक प्रकार का प्रशासनिक प्रमोशन माना जा रहा है।

राजनांदगांव जिला राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।ऐसे में पुलिस अधीक्षक के रूप में अंकिता शर्मा की नियुक्ति न केवल एक रणनीतिक निर्णय है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि सरकार जनता के हित में सक्रिय और निर्भीक प्रशासन चाहती है।उनकी नियुक्ति से जनता में भी यह उम्मीद जगी है कि राजनांदगांव में कानून व्यवस्था और पुलिस जनसंपर्क में नई ऊर्जा देखने को मिलेगी।पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा हमेशा से अपने निर्णयों में निष्पक्ष और निर्भीक रही हैं।

सक्ति में उन्होंने महिला सुरक्षा अभियान, स्कूली बालिकाओं के आत्मरक्षा शिविर, और नशे के खिलाफ जनजागरूकता कार्यक्रम जैसे कई जनहितकारी कार्य किए।उनकी लोकप्रियता केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रही, बल्कि आम जनता ने उन्हें “जनता की पुलिस” के रूप में स्वीकार किया।राजनांदगांव जिला भौगोलिक रूप से विस्तृत और नक्सल प्रभावित इलाकों से जुड़ा है।यहां अपराध नियंत्रण, कानून व्यवस्था की मजबूती और राजनीतिक संतुलन बनाए रखना पुलिस अधीक्षक के लिए बड़ी चुनौती है।हालांकि, अंकिता शर्मा के पिछले कार्यकाल को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि वे यहां भी कानून की सख्ती और जनता की संवेदना दोनों को साथ लेकर चलेंगी।

राज्य सरकार द्वारा अंकिता शर्मा को राजनांदगांव जैसे बड़े जिले की जिम्मेदारी सौंपना केवल एक तबादला नहीं, बल्कि यह संदेश है कि सरकार मेहनत और ईमानदारी की कद्र करती है।अंकिता शर्मा का यह स्थानांतरण अन्य युवा अधिकारियों के लिए प्रेरक उदाहरण बन गया है।यह साबित करता है कि कर्तव्यनिष्ठ, निर्भीक और जनता से जुड़े अधिकारी हमेशा सम्मान और विश्वास के पात्र होते हैं।

अंकिता शर्मा का राजनांदगांव स्थानांतरण छत्तीसगढ़ पुलिस में नई उम्मीदों का प्रतीक है।

यह निर्णय न केवल एक अधिकारी को सम्मानित करने का है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र को यह संदेश देता है कि परिणाम देने वाले अफसरों पर सरकार का भरोसा अटूट है।


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