तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का संभाग इन दिनों नई गति और दिशा की ओर बढ़ रहा है। संभागायुक्त आईएएस महादेव कावरे के नेतृत्व में रायपुर संभाग न केवल विकास के नए कीर्तिमान गढ़ रहा है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और समन्वय के क्षेत्र में भी एक उदाहरण बनकर उभर रहा है। रायपुर संभाग में रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी और दुर्ग जिले शामिल हैं। इन सभी जिलों में विकास योजनाओं की रफ्तार तेज हुई है और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।महादेव कावरे ने पदभार संभालने के बाद सबसे पहले फोकस किया जमीनी स्तर पर योजनाओं की मॉनिटरिंग और जनता से सीधा संवाद पर। उन्होंने जिलों के दौरे कर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए। रायपुर में शहरी विकास और यातायात प्रबंधन को लेकर प्रशासन ने व्यापक योजना बनाई है। महासमुंद और गरियाबंद जैसे अंचलों में सिंचाई, सड़क और शिक्षा संबंधी परियोजनाओं की समीक्षा लगातार की जा रही है। बलौदाबाजार और धमतरी में औद्योगिक क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए निवेश और रोजगार सृजन पर बल दिया गया है।महादेव कावरे की पहचान एक अनुशासित और जवाबदेह प्रशासक के रूप में रही है। रायपुर संभाग में उन्होंने कार्यालयों में समयबद्धता, फाइल निस्तारण की पारदर्शी प्रक्रिया और फील्ड विजिट को अनिवार्य बनाया है। उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि शासन की नीतियों को केवल कागज पर नहीं बल्कि जमीन पर उतारना ही वास्तविक प्रशासन है।रायपुर संभाग में संभागायुक्त ने हर जिले में ‘संभाग स्तरीय जनसुनवाई’ की नई परंपरा शुरू की है, जिसमें ग्रामीण अंचल के लोगों की शिकायतों का मौके पर समाधान किया जा रहा है। इस पहल ने जनता और प्रशासन के बीच विश्वास को मजबूत किया है।संभाग के छहों जिलों के विकास को संतुलित रखने की नीति अपनाई गई है। रायपुर और दुर्ग जैसे शहरी जिलों में इन्फ्रास्ट्रक्चर पर फोकस किया गया है, जबकि गरियाबंद और महासमुंद जैसे अर्धग्रामीण जिलों में कृषि, सिंचाई और शिक्षा पर। बलौदाबाजार और धमतरी को औद्योगिक और पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने पर बल दिया जा रहा है।संभागायुक्त महादेव कावरे ने अपने कार्यकाल में यह साबित किया है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनता से संवाद दोनों दिशा में सक्रिय हों, तो किसी भी क्षेत्र को विकास की रफ्तार से जोड़ा जा सकता है। आज रायपुर संभाग प्रशासनिक कुशलता, जनभागीदारी और विकास के मामले में पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरक मॉडल बन चुका है।


