विकास नंद/सर्वव्यापी/
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा हाल ही में आयोजित कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस में महासमुंद जिले की कानून व्यवस्था को लेकर जताई गई सख्त नाराजगी के बाद भी हालात में सुधार नहीं दिख रहा है। मुख्यमंत्री ने बैठक में जिले में बढ़ते महिला अपराधों और नशे के अवैध कारोबार को लेकर पुलिस विभाग को फटकार लगाई थी तथा जिम्मेदार अधिकारियों को चेतावनी भी दी थी।
बावजूद इसके ओडिशा सीमा से सटे सरायपाली और बसना क्षेत्र में नशे का अवैध व्यापार लगातार बढ़ता जा रहा है।स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सीमावर्ती इलाकों में नशे के सौदागरों ने अपने नेटवर्क को इस कदर फैला लिया है कि बड़ी संख्या में युवा इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं।
शराब, गांजा, ब्राउन शुगर, नशीली दवाइयां और अन्य प्रतिबंधित पदार्थ बेचे जा रहे हैं, जबकि पुलिस की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है।
मीडिया रिपोर्ट्स और सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार इस मुद्दे को उठाया गया है। यहां तक कि शांति समिति की बैठकों में भी नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने अनुविभागीय अधिकारी पुलिस से इस अवैध कारोबार पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन पुलिस विभाग की निष्क्रियता से जनता में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
नागरिकों का कहना है कि विभागीय लापरवाही या मिलीभगत के चलते यह अवैध धंधा दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
सरायपाली नगर की स्थिति और चिंताजनक है। चारों ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग से घिरा यह नगर प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोगों की आवाजाही का केंद्र है। बावजूद इसके, पुलिस द्वारा मोटर व्हीकल चेकिंग, ट्रैफिक मॉनिटरिंग या जागरूकता अभियान जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं तक नहीं चलाई जा रही हैं।
नशे में धुत युवक खुलेआम सड़कों पर तेज रफ्तार से वाहन दौड़ाते देखे जा सकते हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
शहर में व्यापार, शिक्षा, इलाज और बैंकिंग कार्यों के लिए आने वाले नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी कोई ठोस प्रबंध नहीं किए गए हैं। स्थानीय पुलिस अधिकारियों और जवानों की नियमित ड्यूटी तक तय नहीं की जाती, जिससे असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस लापरवाही को लेकर भाजपा नेताओं ने भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जब मुख्यमंत्री और गृहमंत्री स्वयं कानून व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं, तब स्थानीय स्तर पर पुलिस का यह रवैया न केवल निराशाजनक बल्कि सरकार की छवि के लिए भी हानिकारक है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक मौन रहता है और क्या वाकई ओडिशा बॉर्डर से संचालित इस नशे के काले कारोबार तथा सुरक्षा व्यवस्था में व्याप्त लापरवाहियों पर कोई सख्त कार्रवाई की जाती है या फिर यह मामला एक बार फिर फाइलों तक सीमित रह जाएगा।


