तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला लोरमी से पंडरिया मार्ग आज लोगों के लिए सफर नहीं, सज़ा बन चुका है। करीब 30 किलोमीटर लंबी यह मुख्य सड़क बीते कई वर्षों से पूरी तरह जर्जर पड़ी है—गड्ढों में समाई डामर की परत अब इतिहास बन चुकी है, और हर गुजरती गाड़ी के साथ उड़ती धूल, उछलते पत्थर और झटकों का दर्द लोगों की रोजमर्रा की नियति बन गया है।विडंबना यह है कि यह वही क्षेत्र है, जहां से भाजपा के तीन बड़े नेता पूर्व सांसद लखनलाल साहू, वर्तमान सांसद और उपमुख्यमंत्री अरुण साव, तथा केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू एक ही समाज और एक ही जिले से प्रतिनिधित्व करते रहे हैं।इतनी ऊँची राजनीतिक हैसियत के बावजूद, लोरमी–पंडरिया सड़क की बदहाली पर किसी की नजर नहीं पड़ रही।स्थानीय लोगों का कहना है कि हर चुनाव में सड़क सुधार के वादे तो गूंजते हैं, लेकिन जीत के बाद सब कुछ शांत हो जाता है। टूटी सड़कों ने न सिर्फ यात्रा को जोखिमभरा बना दिया है बल्कि ग्राम्य व्यापार, शिक्षा और आपात सेवाओं पर भी भारी असर पड़ा है।लोरमी के लोग अब सवाल पूछ रहे हैं कि जब उपमुख्यमंत्री अरुण साव खुद लोरमी के विधायक हैं, और लोक निर्माण मंत्री का जिम्मा भी उन्हीं के पास है, तो फिर अपने ही क्षेत्र की सड़क क्यों उपेक्षित है?जानकारों का कहना है कि यह सड़क बिलासपुर, कबीरधाम और मुंगेली जिलों को जोड़ने वाली प्रमुख लाइफलाइन है। इसके चौड़ीकरण और पुनर्निर्माण की मांग वर्षों से लंबित है, लेकिन अब तक केवल सर्वे और प्रस्तावों के कागज़ी दौर ही चले हैं।भाजपा सरकार के लिए यह मुद्दा अब जन असंतोष का प्रतीक बनता जा रहा है। जनता का धैर्य जवाब देने लगा है लोग अब यह जानना चाहते हैं कि उपमुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री अरुण साव आखिर कब अपने क्षेत्र की इस दर्दभरी सड़क को विकास पथ में बदलेंगे?


