तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में मंगलवार 11 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर “जनजातीय धरोहर का उत्सव” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जी.बी. पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, प्रयागराज के अध्यक्ष एवं केंद्रीय आदिवासी विश्वविद्यालय, आंध्रप्रदेश तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के पूर्व कुलपति प्रो. टी.वी. कट्टीमणि मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।अपने सारगर्भित संबोधन में प्रो. कट्टीमणि ने कहा कि भारत के जनजातीय समाज के समृद्ध इतिहास को सामने लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की मुक्त मानसिकता ही उनके स्वतंत्र जीवन का प्रतीक है। धरती आबा बिरसा मुंडा के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रेज़ों के विरुद्ध उनका संघर्ष भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का स्वर्णिम अध्याय है। भारत सरकार द्वारा उनके जन्मदिवस को “जनजातीय गौरव दिवस” के रूप में मनाने का निर्णय उनके बलिदान और योगदान का सम्मान है।प्रो. कट्टीमणि ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, वाद्य, संगीत, चित्रकला, औषधि-ज्ञान और पाक-कला जैसे विषयों पर अधिकाधिक लेखन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा के विस्तार में “आदिवासी का तड़का” आवश्यक है — क्योंकि उनकी भाषाएं, परंपराएं और जीवनशैली भारत की सांस्कृतिक विविधता का अमूल्य हिस्सा हैं।कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि राष्ट्रनिर्माण में आदिवासियों की भूमिका को पर्याप्त रूप से नहीं रेखांकित किया गया है। हिंदी के विकास के लिए जनजातीय भाषाओं पर अध्ययन और संवाद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की संस्कृति हमें उनकी समृद्ध विरासत से परिचित कराती है और विकसित भारत के निर्माण हेतु उनके आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए।कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं बिरसा मुंडा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने प्रो. कट्टीमणि का स्वागत शॉल, सूतमाला एवं विश्वविद्यालय प्रतीकचिह्न भेंट कर किया।कार्यक्रम से पूर्व जनजातीय नायकों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन अटल बिहारी वाजपेयी भवन में प्रो. कट्टीमणि और प्रो. शर्मा द्वारा किया गया। यह प्रदर्शनी 15 नवंबर तक आम जनता के लिए खुली रहेगी।कार्यक्रम का स्वागत भाषण संस्कृति विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. अवधेश कुमार ने किया, संचालन हिंदी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने तथा आभार प्रदर्शन कुलसचिव क़ादर नवाज़ ख़ान ने किया।कार्यक्रम का आरंभ विश्वविद्यालय कुलगीत से हुआ और समापन राष्ट्रीय गान से किया गया।इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अध्यापक, कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


