तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
भारत भूमि की पावन नगरी मथुरा में आयोजित भव्य कार्यक्रम सजल महोत्सव के अंतर्गत पुस्तक विमोचन एवं सम्मान समारोह मथुरा सभागार में संपन्न हुआ। इस अवसर पर बिलासपुर, छत्तीसगढ़ की लेखिका धनेश्वरी सोनी ‘गुल’ की पुस्तक ‘अंतर्मन’ का विमोचन हुआ। साथ ही देशभर के साहित्यकारों की अनेक पुस्तकों का भी विमोचन किया गया।कार्यक्रम का प्रथम सत्र विमोचन और सम्मान समारोह के रूप में अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यप्रेमियों ने सजल के प्रति अपने समर्पण भाव को अभिव्यक्त किया। जीवन को साहित्य का अभिन्न अंग मानने वाले अनेक मनीषी इस आयोजन की शोभा बने।साहित्य को माँ सरस्वती का वरदान बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि जो कलम की पूजा करता है, माँ बागेश्वरी उसके हर शब्द में बस जाती हैं। कवि, लेखक, और लेखिका अपने शब्द-सुमन माता के चरणों में अर्पित कर समाज की जागृति के लिए वरदान मांगते हैं। लेखनी जीवन में आनंद, उल्लास, देशप्रेम, करुणा, दया, मानवता और सद्भावना का संचार करती है। सरस्वती की पूजा का अर्थ हर रूप में गीता, गंगा, गौरी, दुर्गा और लक्ष्मी की आराधना है। साहित्य भावों की गंगा है, जो गौरी की तरह संकल्पित साधना से रत और लक्ष्मी की तरह वैभव देने वाली है।इस अवसर पर कुल पचासी पुस्तकों का विमोचन हुआ, जो अपने आप में एक गौरवपूर्ण उपलब्धि रही। सजल परिवार के लेखक अत्यंत उत्साहित और आनंदित दिखे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिल गहलौद के मार्गदर्शन में हुआ, जिनके नेतृत्व में सजल की साहित्यिक यात्रा पूरे देश में अपनी छाप छोड़ रही है।कार्यक्रम में हरवेंद्र, विजय, नीलिमा, पूनम, श्रद्धा, महेज, धनेश्वरी सोनी ‘गुल’, किरण, आशा, सतीष, सुरेश, गोपाल, सपन, गौरव, अरुणा, संतोष सहित अनेक रचनाकारों की उपस्थिति रही। सम्मान की कड़ी में धनेश्वरी गुल ने नीलिमा को सम्मान प्रदान किया, साथ ही धनेश्वरी को भी पटल से सम्मान पत्र मिला।दूसरे सत्र में वृहद काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें एक से बढ़कर एक काव्य-पाठ प्रस्तुत किए गए। यह सत्र अत्यंत प्रेरणादायक, आनंदित और भाव-विभोर करने वाला रहा।


