तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
राजधानी रायपुर के मंत्रालय परिसर में इन दिनों दो आईएएस अफसरों की जोड़ी चर्चा में है-पी. दयानंद और डॉ. एस. बसवराजू। दोनों ही मुख्यमंत्री के सचिवालय में पदस्थ हैं, और सत्ता गलियारों में इन्हें प्यार से “राम-लखन जोड़ी” कहा जाने लगा है।एक तरफ पी. दयानंद, खनिज संसाधन विभाग के सचिव के रूप में खदानों की दुनिया में ‘खनक’ तलाशने में व्यस्त हैं, तो दूसरी ओर डॉ. एस. बसवराजू, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की बागडोर संभालते हुए शहरों में ‘चमक’ फैलाने का जिम्मा उठाए हुए हैं।सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री कार्यालय में जब भी कोई महत्वपूर्ण निर्णय होता है, तो इस जोड़ी की ‘डबल एक्सपर्टीज़’ काम आती है। एक विकास का नक्शा खींचता है, दूसरा उसमें खनिज की चमक भर देता है।कहने वाले तो यहां तक कहते हैं कि “जहां बसवराजू हैं, वहां सफाई अभियान चलता है, और जहां दयानंद हैं, वहां खुदाई अभियान।”राज्य प्रशासन में दोनों की कार्यशैली एक-दूसरे से भले ही अलग हो, पर तालमेल ऐसा कि वरिष्ठ अफसर भी दंग रह जाते हैं। मंत्रालय के गलियारों में अफसरशाही के अनुभवी लोग मज़ाक में कहते हैं कि मुख्यमंत्री के सचिवालय में अब सिर्फ योजना नहीं, ‘जुगलबंदी’ भी बनती है!जहां दयानंद योजनाओं में नीतिगत ठोसपन लाते हैं, वहीं बसवराजू उन्हें जमीनी हकीकत में उतारने की रणनीति तैयार करते हैं। यही कारण है कि इनकी जोड़ी को आज सत्ता के गलियारों में “राम-लखन” के नाम से पहचान मिल चुकी है। फर्क सिर्फ इतना है कि फिल्म वाले ‘राम-लखन’ गाना गाते थे ‘माई नेम इज लखन’, और ये दोनों अफसर फाइलों में गुनगुनाते हैं ‘माई नेम इज गवर्नेंस!’


