तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ एक हरियर धरती आय जऊन ला प्रकृति खुद अपन हाथ ले संवारे हवय। उत्तर ले दक्षिण तक, कोरिया ले बस्तर तक, जशपुर-मैनपाट ले गरियाबंद-बालोद तक, अउ अंबिकापुर ले गौरेला–पेंड्रा–मरवाही तक पूरा छत्तीसगढ़ मानों हरियाली, संस्कृति, परंपरा अउ पर्यटन के एक जीवंत चित्र आय। बस्तर के घने जंगल, पहाड़ी, झरना अउ वहां के आदिवासी समाज के मौलिक संस्कृति छत्तीसगढ़ के गौरव हावय। साल-साजा-बीजा के जंगल, चित्रकोट-तीरथगढ़ के प्रपात, कुटुमसर के गुफा, मांदर के ताल, गौर नाच के लय, ये सब बस्तर ला प्रकृति अउ संस्कृति के राजधानी बना देथें।बस्तर के बाद जब नजर उत्तर-पूरब मं जाए त छत्तीसगढ़ के ‘मिनी दार्जिलिंग’ जशपुर अपन कोमल खूबसूरती के संग खड़ा मिलथे। बादल ले घिरे पहाड़, कुडरू झरना, कर्मेल घाटी, रानीझरना, छोटानागपुरी संस्कृति के सुगंध जशपुर छत्तीसगढ़ के पर्यटन के सितारा हावय। जशपुर के पहाड़ी हवापानी मनखे ला ठंडक देथे अउ घना जंगल मन आंखी ला हरियरपन देथें। जशपुर के बगल मं बसे मैनपाट के बातच अलग आय। छत्तीसगढ़ के तिब्बत कहे जाने वाला मैनपाट अपन शांत पठार, बादल ले ढके घाटी, टाइगर पॉइंट, फिश पॉइंट, परसपानी अउ तिब्बती मठ ले पर्यटकों के दिल ला तुरंत जीत लेथे। छत्तीसगढ़ मं एतका स्वच्छ, ठंडा अउ शांत जगह कम दिखे मिलथे।सरगुजा संभाग के भीतर गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिला हरियाली के असली धड़कन आय। देवदारी के घना जंगल, अमरकंटक पठार के छोर, बिल्लौंगी झरना, पहाड़ी रास्ता ,ये सब प्रकृति के शांत रूप ला जिंदा रखे हें। गौरेला पेंड्रा मरवाही राज्य के सबसे सुरक्षित, हरियर अउ स्वच्छ प्राकृतिक क्षेत्र मं गिनाय जाथे, जिहां आज घलो जंगल अपन मूल स्वरूप मं बचे हवय।उत्तर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर-सरगुजा क्षेत्र स्वच्छता अउ सौंदर्य के राजधानी आय। महेशपुर झरना, ततापानी के गर्म जलकुंड, सेमरसोत अभयारण्य, धोरसागर डैम अउ आसपास के पहाड़ी इलाका प्राकृतिक पर्यटन ला नवा पहचान देथें। अंबिकापुर के ठंडा मौसम, पहाड़ी हवा अउ हरियर जंगल छत्तीसगढ़ के छाती मं बसे रत्न जइसने हें।पूर्व छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिला श्रद्धा, प्राकृतिक जलप्रपात अउ शांत जंगल के अद्भुत मेल आय। सिकासेर डैम, राजीव लोचन मंदिर, चिरचराट झरना, बाबूछापर अभयारण्य अउ सहजपुरी के सिंहवाहिनी माता मंदिर ये सब गरियाबंद ला सांस्कृतिक अउ प्राकृतिक दूनों दृष्टि ले समृद्ध बनाथें।बालोद जिला अपन झरना, पहाड़ी अउ इतिहास बर प्रसिद्ध आय। तारकीरा झरना, सीतानदी अभयारण्य, तूदा डोंगरी अउ आसपास के हरियर इलाका ये सब बालोद के ग्रामीण सांस्कृतिक सौंदर्य ला दर्शाथें। छत्तीसगढ़ के असली संस्कृति गांव-गरीब में बसत हवय, अउ बालोद के गांव आज घलो ओही मूल पहचान ला सम्हारे हवय।छत्तीसगढ़ के दूसर कई जिला जैसे कोरिया के अमृतधारा, धमतरी के गंगरेल बांध अउ सिहावा पर्वत, कांकेर के मालंजन घाटी, मुंगेली के अचानकमार टाइगर रिज़र्व—भी प्रकृति अउ पर्यटन के अनमोल स्रोत हें, जेकर संरक्षण अउ विकास मं बड़े संभावना हें।आज छत्तीसगढ़ के पर्यटन, हरियाली अउ संस्कृति तीनों के संतुलन बने रहना जरूरी आय। जंगल कटही त संस्कृति कमजोर पड़ही, संस्कृति कमजोर पड़ही त पर्यटन घटही। ये राज्य अपन हरियाली, अपन नदी-झरना, अपन आदिवासी विरासत अउ अपन पारंपरिक जीवनशैली बर जाना जाथे।सरकार अउ समाज दूनो ला ई बात याद रखना चाही कि छत्तीसगढ़ के हरियाली ओकर सौंदर्य नोहे ओकर आत्मा आय। बस्तर ले जशपुर तक, मैनपाट ले गौरेला पेंड्रा मरवाही तक, गरियाबंद ले अंबिकापुर तक ये पूरा हरियर पट्टी छत्तीसगढ़ के वर्तमान नोहे, बल्कि ओकर भविष्य आय।


