कलेक्टर से मुख्य सचिव तक… विकास शील की सादगी और संवेदनशीलता वही, जनता के बीच आज भी उतनी ही सहज मौजूदगी। - Sarvavyapi कलेक्टर से मुख्य सचिव तक… विकास शील की सादगी और संवेदनशीलता वही, जनता के बीच आज भी उतनी ही सहज मौजूदगी। - Sarvavyapi

कलेक्टर से मुख्य सचिव तक… विकास शील की सादगी और संवेदनशीलता वही, जनता के बीच आज भी उतनी ही सहज मौजूदगी।

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

कभी बिलासपुर कलेक्टर के रूप में अपनी सरलता, संवेदनशीलता और तेजतर्रार कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले विकास शील आज छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव के पद पर विराजमान हैं, लेकिन पद बदलने के साथ उनकी शैली नहीं बदली। बिलासपुर में उनके कार्यकाल को आज भी लोग याद करते हैं, वह दौर जब वे बिना किसी औपचारिकता के आम नागरिकों से मिलते, समस्याएँ सुनते और तत्काल समाधान करते थे।आज, मुख्य सचिव बनने के बाद भी वही सहजता और सादगी उनके व्यक्तित्व में कायम है। पद बड़ा हुआ, जिम्मेदारियाँ बढ़ीं, पर जनता से दूरी नहीं। विकास शील आज भी बिना हिचकिचाहट लोगों से मिलते हैं, उनकी बातें ध्यान से सुनते हैं और समाधान की स्पष्ट दिशा दिखाते हैं। यही कारण है कि प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम नागरिकों तक, हर कोई उनकी कार्यशैली का मुरीद है।मुख्य सचिव बनने के बाद भी जनता से उसी आत्मीयता और सरल व्यवहार के साथ मिलने का सिलसिला जारी रखना इस बात का प्रमाण है कि विकास शील जैसे अधिकारी पद से नहीं, अपने काम और व्यवहार से बड़े बनते हैं। वाकई—वाह विकास शील साहब!


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