पंडवानी की अमर स्वर-साधिका तीजन बाई को वीणापाणि संगीत विद्यालय की भावभीनी श्रद्धांजलि। - Sarvavyapi पंडवानी की अमर स्वर-साधिका तीजन बाई को वीणापाणि संगीत विद्यालय की भावभीनी श्रद्धांजलि। - Sarvavyapi

पंडवानी की अमर स्वर-साधिका तीजन बाई को वीणापाणि संगीत विद्यालय की भावभीनी श्रद्धांजलि।

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विकास नंद/सर्वव्यापी

विश्वविख्यात पंडवानी गायिका, पद्म विभूषण से सम्मानित लोककला की महान साधिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर वीणापाणि संगीत विद्यालय, बस्ती सरायपाली के परिवार ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। विद्यालय परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई तथा उनके कला-साधना से जुड़े अविस्मरणीय योगदान को याद किया गया।विद्यालय के संचालक जन्मजय नायक ने कहा कि तीजन बाई केवल एक कलाकार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की पहचान थीं। उन्होंने अपनी ओजस्वी आवाज, अद्भुत प्रस्तुति और पंडवानी की विशिष्ट शैली से इस लोककला को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाई। उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ की मिट्टी का अमर श्रृंगार आज हमारे बीच नहीं रहा। तंबूरा थामकर महाभारत के पात्रों को जीवंत कर देने वाली वह बुलंद आवाज हमेशा के लिए शांत हो गई। तीजन बाई के रूप में छत्तीसगढ़ ने अपनी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर खो दी है, लेकिन उनकी स्मृतियां सदैव हमारे हृदयों में जीवित रहेंगी।”विद्यालय के प्राचार्य सुकनाथ चौहान ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि तीजन बाई की प्रस्तुति अपने आप में अद्वितीय होती थी। जैसे ही उनका पंडवानी गायन आरंभ होता, उनका रंग-बिरंगे फुंदनों से सजा तानपुरा कभी दुशासन की भुजा, कभी अर्जुन का रथ, कभी भीम की गदा तो कभी द्रौपदी के केश का रूप धारण कर लेता था। उनकी सशक्त अभिव्यक्ति श्रोताओं को महाभारत काल की घटनाओं से भावनात्मक रूप से जोड़ देती थी, जहां वे जोश, क्रोध, पीड़ा, उत्साह, उमंग और संघर्ष जैसी संवेदनाओं को सजीव रूप में महसूस करते थे।श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित संगीत प्रेमियों और विद्यालय परिवार ने कहा कि तीजन बाई का निधन केवल संगीत जगत ही नहीं, बल्कि पूरे देश की लोक-सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी कला, व्यक्तित्व और लोकसंस्कृति के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।


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