विकास नंद/सर्वव्यापी/
महासमुंद जिले में जनवरी माह के दौरान मुख्यमंत्री साय के संभावित सरायपाली आगमन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों पर कार्यक्रमों में भीड़ जुटाने एवं व्यवस्थाओं का दबाव बढ़ने की आशंका से सरपंचों एवं पंचायत प्रतिनिधियों में नाराजगी और चिंता का माहौल बन गया है।एक ओर जहां पंचायतों को लंबे समय से 15वें वित्त आयोग की राशि प्राप्त नहीं हुई है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक और राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर पंचायतों से अपेक्षाएं लगातार बढ़ाई जा रही हैं। वित्तीय संकट से जूझ रही ग्राम पंचायतें बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में असमर्थ हैं। पेयजल व्यवस्था, नाली निर्माण, सड़क मरम्मत, साफ-सफाई और स्वच्छता जैसे आवश्यक कार्य पूरी तरह प्रभावित हो चुके हैं।सरपंचों का कहना है कि 15वें वित्त आयोग की राशि पंचायतों के लिए जीवनरेखा है। इसी राशि से गांवों के दैनिक एवं विकास कार्य संचालित होते हैं। राशि के अभाव में पंचायतें आर्थिक रूप से पंगु हो गई हैं, बावजूद इसके उन पर अतिरिक्त दायित्व डाले जा रहे हैं, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है।पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि गांवों की समस्याओं को लेकर ग्रामीण सीधे जनप्रतिनिधियों से सवाल कर रहे हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण वे समाधान देने की स्थिति में नहीं हैं। अब मुख्यमंत्री के संभावित आगमन को लेकर भीड़ जुटाने और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी पंचायतों पर सौंपे जाने की चर्चाओं से जनप्रतिनिधियों का मानसिक दबाव और बढ़ गया है।गौरतलब है कि हाल ही में जिले के सरपंचों एवं पंचायत प्रतिनिधियों ने जिला मुख्यालय महासमुंद में एकदिवसीय धरना प्रदर्शन कर 15वें वित्त आयोग की लंबित राशि शीघ्र जारी करने की मांग की थी। प्रदर्शन के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि पंचायतों की आर्थिक स्थिति में शीघ्र सुधार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।सरपंच संघ ने शासन से मांग की है कि पहले पंचायतों को उनका वैधानिक अधिकार दिलाया जाए, उसके बाद ही अतिरिक्त दायित्व सौंपे जाएं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री के संभावित दौरे से पूर्व पंचायतों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा, ताकि ग्राम स्तर पर शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव हो सके।