पहले ट्रक उतरे, फिर टेंडर खुला!जेम पोर्टल या ‘पहले तय–बाद में दिखावा’ की सरकारी दुकान?

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ में सरकारी टेंडर व्यवस्था अब पारदर्शिता नहीं, पूर्व-निर्धारित पटकथा का हिस्सा बनती जा रही है। जेम पोर्टल, जिसे ईमानदारी और निष्पक्षता का डिजिटल प्रतीक बताया जाता है, वही अब सवालों के घेरे में है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री सुबोध हरितवाल ने आरोप लगाया कि राज्य में टेंडर खुलना महज़ रस्म रह गया है, असली फैसला उससे पहले ही हो जाता है।हरितवाल ने बालोद जिले में प्रस्तावित नेशनल लेवल रोवर-रेंजर जंबूरी 2026 के आयोजन को इसका ताजा और प्रत्यक्ष उदाहरण बताया। जानकारी के अनुसार आयोजन से जुड़ा टेंडर 03 जनवरी को सुबह 12 बजे जेम पोर्टल पर खुलना था, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उससे पहले ही शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज बालोद परिसर में एक निजी कंपनी द्वारा काम शुरू कर दिया गया।मौके पर भारत किराया भंडार के ट्रक, निर्माण सामग्री और मजदूरों की मौजूदगी ने इस “संयोग” को संदेह से कहीं आगे पहुंचा दिया। सवाल यह है कि जब टेंडर खुला ही नहीं था, तो कंपनी को काम शुरू करने का आदेश किसने दिया? क्या जेम पोर्टल अब सिर्फ दिखावे का मंच रह गया है?हरितवाल ने सीधे तौर पर पूछा कि क्या मंत्री गजेंद्र यादव और संबंधित अधिकारियों ने पहले ही कंपनी को काम मिलने का आश्वासन दे दिया था। यदि ऐसा है, तो नियमों का पालन करते हुए टेंडर खुलने का इंतजार कर रहे अन्य निविदाकर्ताओं के साथ यह खुला अन्याय नहीं तो और क्या है?मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब टेंडर दस्तावेज में दर्ज संबंधित अधिकारी के मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन स्विच ऑफ मिला। कांग्रेस ने इसे जवाबदेही से बचने की कोशिश बताया और सवाल उठाया कि क्या अधिकारी जानबूझकर “नेटवर्क से बाहर” चले गए थे।जंबूरी का आयोजन 9 से 13 जनवरी तक प्रस्तावित है और यह सीधे तौर पर स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़ा मामला है। ऐसे में विभागीय मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि बिना राजनीतिक संरक्षण के इस तरह की जल्दबाज़ी संभव ही नहीं है।प्रदेश कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि दोषी मंत्री, अधिकारी और संबंधित कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।बालोद से उठा यह सवाल केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की पूरी टेंडर व्यवस्था और जेम पोर्टल के नाम पर चल रहे कथित “पहले तय, बाद में प्रक्रिया” के खेल को उजागर करता है।इस विषय पर आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर, वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा और अमित तिवारी भी उपस्थित रहे।


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