तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग को लेकर एक बार फिर सियासी और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ पत्रकार प्रभात मिश्रा को आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने की प्रबल संभावना है। यदि यह नियुक्ति होती है तो एक बार फिर इस महत्वपूर्ण आयोग की कमान ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधि के हाथों में जाएगी, जिसे लेकर विभिन्न वर्गों में चर्चा शुरू हो गई है।राजभाषा आयोग जैसे संवेदनशील और वैचारिक संस्थान में लगातार ब्राह्मण समाज से अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं, वहीं समर्थकों का तर्क है कि अनुभव, भाषा पर पकड़ और बौद्धिक योग्यता के आधार पर चयन होना चाहिए। प्रभात मिश्रा का नाम इसी पृष्ठभूमि में आगे बढ़ाया जा रहा है।पत्रकारिता जगत में लंबे समय से सक्रिय प्रभात मिश्रा हिंदी, छत्तीसगढ़ी और राजभाषा के मुद्दों पर मुखर राय रखने वाले माने जाते हैं। उनके संभावित मनोनयन को शासन की उस रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें राजभाषा आयोग को अधिक प्रभावी और सक्रिय बनाने की मंशा सामने आ रही है।सूत्र बताते हैं कि शासन स्तर पर सहमति लगभग बन चुकी है और आज–कल में औपचारिक आदेश जारी हो सकता है। आदेश जारी होते ही आयोग की नई दिशा और भूमिका को लेकर चर्चाएं और तेज होने की संभावना है। अब देखना होगा कि सरकार इस नियुक्ति के जरिए सिर्फ प्रशासनिक संतुलन साधती है या सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर उठ रहे सवालों पर भी कोई स्पष्ट संदेश देती है।