दो साल बाद सत्ता की असली परीक्षा: सुबोध कुमार सिंह के कंधों पर भाजपा सरकार की जन-छवि।

Share Now

तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। सत्ता के इस पड़ाव पर सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि क्या फैसले लिए गए, बल्कि यह है कि उन फैसलों का असर आम जनता ने कितना महसूस किया। यही वह बिंदु है, जहां मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह की भूमिका निर्णायक बन जाती है।सरकार के पहले वर्ष में नीतियों की दिशा तय हुई और दूसरे वर्ष में उन नीतियों के क्रियान्वयन की प्रक्रिया तेज की गई। अब तीसरे वर्ष की शुरुआत के साथ जनता अपेक्षा कर रही है कि प्रशासनिक सिस्टम केवल आदेश जारी करने वाला न रहे, बल्कि समस्याओं का त्वरित समाधान देने वाला बने। इस अपेक्षा का सीधा संबंध प्रमुख सचिव की कार्यशैली से जुड़ता है।सुबोध कुमार सिंह एक ऐसे आईएएस अधिकारी हैं, जिन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में शासन के भीतर रहकर सत्ता और सिस्टम के रिश्ते को समझा। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान प्राप्त अनुभव ने उन्हें नीतिगत सोच और प्रशासनिक अनुशासन दोनों का व्यावहारिक ज्ञान दिया। अब यही अनुभव वर्तमान भाजपा सरकार में परिणाम के रूप में दिखना चाहिए, यही जनता की कसौटी है।वर्तमान स्थिति में सरकार की छवि कहीं न कहीं दो हिस्सों में बंटी दिखाई देती है। एक ओर बड़े फैसलों में सख्ती और तेजी नजर आती है, तो दूसरी ओर जमीनी स्तर पर शिकायतों और फील्ड अफसरों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में प्रमुख सचिव के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मंत्रालय से लेकर जिला स्तर तक शासन की एक समान संवेदनशील और जवाबदेह तस्वीर उभरे।दो साल पूरे होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि केवल योजनाओं की घोषणा से सरकार की पहचान नहीं बनती। पहचान तब बनती है, जब आम नागरिक को समय पर सेवा मिले, शिकायत दर्ज कराने पर सुनवाई हो और अधिकारी जवाबदेह नजर आएं। इन सभी बिंदुओं पर प्रशासनिक नियंत्रण और निगरानी प्रमुख सचिव कार्यालय से ही संचालित होती है।राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासनिक निर्णयों के बीच संतुलन बनाए रखना भी वर्तमान समय की बड़ी जरूरत है। कई बार प्रशासनिक फैसले सही होने के बावजूद राजनीतिक संवाद की कमी से उनका संदेश जनता तक नहीं पहुंच पाता। इसका सीधा नुकसान सरकार की छवि को होता है। ऐसे में सुबोध कुमार सिंह की भूमिका केवल अफसरों को निर्देश देने तक सीमित नहीं, बल्कि सरकार के फैसलों की सही व्याख्या और समन्वय सुनिश्चित करने तक विस्तृत हो जाती है।भाजपा सरकार के लिए तीसरा साल निर्णायक माना जा रहा है। यह वह दौर है जब जनता पिछले दो वर्षों का लेखा-जोखा मन ही मन कर चुकी होती है। यदि इस चरण में प्रशासनिक सिस्टम अधिक सक्रिय, पारदर्शी और जनोन्मुखी दिखाई देता है, तो सरकार को इसका राजनीतिक लाभ मिलना तय है। और यदि सिस्टम में ढिलाई या भ्रम बना रहा, तो विपक्ष को मुद्दे मिलना भी तय है।दो साल पूरे होने के बाद छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार अब भरोसे की पुनर्परीक्षा के दौर में है। इस पुनर्परीक्षा का प्रशासनिक चेहरा प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह हैं। आने वाले समय में यही तय होगा कि उनका अनुभव सत्ता के लिए केवल सहारा बनता है, या जनता के लिए सुशासन की ठोस गारंटी।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!