तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में एक बार फिर बड़े प्रशासनिक फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार जल्द ही डीएफओ (वन मंडलाधिकारी) स्तर पर व्यापक स्थानांतरण सूची जारी करने की तैयारी में है। इस प्रस्तावित तबादला सूची को लेकर विभागीय गलियारों में गंभीर चर्चा और असहजता का माहौल है।सूत्रों का दावा है कि जिन डीएफओ अधिकारियों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में भ्रष्टाचार, अवैध कटाई, वनभूमि अतिक्रमण और लकड़ी तस्करी जैसे मामलों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया, उन्हें प्रोत्साहन या बेहतर जिम्मेदारी देने के बजाय ‘लूप लाइन’ मानी जाने वाली दूरस्थ और प्रभावहीन पोस्टिंग पर भेजने की तैयारी चल रही है। इससे ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों के मनोबल पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।बताया जा रहा है कि इस पूरी तबादला प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में वन मंत्री केदार कश्यप की भूमिका बेहद अहम है। मंत्री स्तर पर स्थानांतरण की रूपरेखा लगभग तैयार मानी जा रही है और किसी भी समय इसे औपचारिक मंजूरी दी जा सकती है। यही कारण है कि विभाग के भीतर कई अधिकारी असमंजस और दबाव की स्थिति में नजर आ रहे हैं।वन विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले अफसरों को ही हाशिये पर धकेला गया, तो इसका सीधा संदेश नीचे तक जाएगा कि ईमानदारी और सख्ती की कीमत चुकानी पड़ती है। इससे न केवल विभागीय अनुशासन कमजोर होगा, बल्कि वन संरक्षण और पर्यावरणीय लक्ष्यों पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।वर्तमान में पूरा विभाग इस बात पर नजर टिकाए हुए है कि तबादला सूची में किन अधिकारियों को मुख्यधारा में रखा जाता है और किन्हें साइड लाइन किया जाता है। आने वाले दिनों में जारी होने वाली स्थानांतरण सूची से यह साफ हो जाएगा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े अफसरों के साथ वास्तव में किस तरह का व्यवहार करने जा रही है।