कानून के रखवाले या कमीशन के सौदागर?

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तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में पुलिस महकमे की साख एक बार फिर कठघरे में खड़ी हो गई है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) राजेन्द्र प्रसाद जायसवाल पर एक स्पा सेंटर संचालक ने हर महीने मोटी कमीशन वसूली करने का गंभीर आरोप लगाया है। मामला सामने आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और पुलिस महानिरीक्षक डॉ संजीव शुक्ला ने पूरे प्रकरण की जांच करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह को आदेश दिए हैं।सूत्रों के अनुसार, स्पा सेंटर संचालक का आरोप है कि कथित संरक्षण के बदले उससे नियमित रूप से रकम वसूली जाती थी। यह कोई पहला मामला नहीं बताया जा रहा, बल्कि शहर में यह चर्चा आम है कि पुलिस प्रशासन के भीतर कमीशनखोरी का खेल खुलेआम चल रहा है। इसी कथित “संरक्षण व्यवस्था” के चलते अपराध से जुड़े लोग बेखौफ होकर गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिनके कंधों पर कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी है, उन्हीं पर अवैध वसूली जैसे आरोप लगना पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। आम नागरिकों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और ईमानदारी से नहीं हुई, तो यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।एसएसपी द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बाद अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सचमुच दूध का दूध और पानी का पानी होगा, या फिर यह मामला भी सिस्टम की “कमीशन संस्कृति” में गुम हो जाएगा। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल एक अधिकारी की नहीं, बल्कि पूरे पुलिस प्रशासन की साख पर करारा तमाचा होगा।


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